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गुरुवार के दिन इस कथा का पाठ कर गाएं ये आरती, हर मनोकामना होगी पूरी

गुरुवार के दिन इस कथा का पाठ कर गाएं ये आरती, हर मनोकामना होगी पूरी

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Tanvi Sharma

May 30, 2018

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गुरुवार के दिन इस कथा का पाठ कर गाएं ये आरती, हर मनोकामना होगी पूरी

गुरुवार के दिन बृहस्पति देव की पूजा की जाती है। इस दिन पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं। कई लोग अपनी अलग-अलग मनोकामनाओं को लेकर गुरुवार के दिन व्रत भी रखते हैं। इस दिन पूजा करने के लिए पीले कपड़े पहनने चाहिए, पूजा में सभी चीजें पीले रंग की ही उपयोग में लानी चाहिए, वहीं दूसरी तरफ आपको कुछ चीजों का परहेज भी करना पड़ता है। आइए आपको बताते हैं कैसे की जाती है गुरुवार की पूजा की विधी और किस आरती को करने से होती हर मनोकामनाएं पूरी।

गुरुवार के दिन पूजा की विधि

इस दिन विधि-विधान के अनुसार पूजा की जानी चाहिए, व्रत वाले दिन सुबह उठकर बृहस्पति देव का पूजन करें और बृहस्पति देव के पूजन में पीली वस्तुओं को अवश्य रखें। इस व्रत में केले के पेड़ की का पूजा की जाती है। कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर मनोकामना पूर्ति के लिए बृहस्पतिदेव से प्रार्थना करनी चाहिए। गुरुवार का व्रत आप कुछ दिन या चाहें तो पूरी जिंदगी के लिए भी रख सकते है।

यंत्र की स्थपना करके पूजन करें। पूजा में केवल पीली वस्तुओं का प्रयोग करते है।
[typography_font:14pt;" >इसके लिए पीले फूल, चने की दाल, पीली मिठाई, पीले चावल, और हल्दी का प्रयोग उचित रहेगा। इस व्रत में केले के पेड़ को चने की दाल से पूजा जाता है। जिसके लिए आप अपने घर के पास स्थित किसी केले के पेड़ या मंदिर में मौजूद केले के पेड़ की पूजा कर सकते है। व्रत के लिए व्यक्ति का पूरी तरह से शुद्ध होना जरुरी है। केले के पेड़ के पूजन के लिए जल में हल्दी डालकर चढ़ाएं, फिर चने की दाल और मुन्नके चढ़ाएं। अब पेड़ में घी का दीपक जलाएं और आरती करें। वैसे तो यह व्रत पुरे दिन के लिए रखा जाया है लेकिन यदि आप चाहे तो दिन में एक बार भोजन खा सकते है। भोजन करने के लिए चने की दाल या पीले रंग के खाद्य पदार्थो का ही प्रयोग करें। इस व्रत में नमक निषेध है अर्थात – इस दिन नमक का सेवन नहीं किया जा सकता। नहाने के बाद ही पीले रंग के वस्त्र पहनें और पूजा के समय भी इन्ही वस्त्रो को पहनें। भोग लगाने के लिए केलो को बहुत शुभ माना जाता है। जिन्हें पूजन के बाद दान में दे देना चाहिए। पूजन समाप्त होने पर बृहस्पति देव की कथा अवश्य सुनें। कहते है बिना कथा सुने व्रत सम्पूर्ण नहीं माना जाता और व्रत का पूर्ण फल प्राप्ति के लिए बृहस्पतिदेव की आरती भी गाएं।

भगवान जगदीश की आरती से होती है हर मनोकामनाएं पूरी

भक्तजनों के संकट क्षण में दूर करे॥

सुख-संपत्ति घर आवै, कष्ट मिटे तन का॥ ॐ जय…॥

तुम बिनु और न दूजा, आस करूं जिसकी॥ ॐ जय…॥

पारब्रह्म परेमश्वर, तुम सबके स्वामी॥ ॐ जय…॥

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥ ॐ जय…॥

किस विधि मिलूं दयामय! तुमको मैं कुमति॥ ॐ जय…॥

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥ ॐ जय…॥

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, संतन की सेवा॥ ॐ जय…॥

तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा॥ ॐ जय…॥

कहत शिवानंद स्वामी, मनवांछित फल पावे॥ ॐ जय…॥


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