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सुंदरकांड पाठ से बनते हैं बिगड़े काम, ये है पाठ का सही तरीका

हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए अगर कोई सबसे सटीक उपाय है तो वह है हनुमानचालिसा तथा सुंदरकांड का पाठ

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Sunil Sharma

Dec 18, 2015

Hanumanji in Ram Ravan war

Hanumanji in Ram Ravan war

हनुमान जी
को प्रसन्न करने के लिए अगर कोई सबसे सटीक उपाय है तो वह है हनुमानचालिसा तथा सुंदरकांड का पाठ। इन दो में से कोई भी एक उपाय श्रद्धापूर्वक करने पर बजरंग बली अपने भक्तों से प्रसन्न होकर उनके सभी बिगड़े काम बना देते हैं।


श्रीरामचरितमानस के सुंदरकांड
अध्याय में बजरंग बली की महिमा का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें विशेष रूप से हनुमान जी के विजय का गान किया गया है जो पढ़ने वाले में आत्मविश्वास का संचार करता है। सुंदरकांड पाठ की सबसे खास बात यह है कि इससे ना सिर्फ हनुमानजी का आशीर्वाद मिलता है बल्कि भगवान श्रीराम का भी आर्शीवाद प्राप्त होता है।


कुंडली के बिगड़े ग्रहों को संवार देता है सुंदरकांड का पाठ


ज्योतिषियों के अनुसार विशेष रूप से शनिवार तथा मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ करने वाले को सभी विपत्तियों से छुटकारा मिलता है और अनेकानेक अच्छे परिणाम सामने आते हैं। इसके सस्वर पाठ से घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियां यथा भूत-प्रेत, चुडैल, डायन आदि भी घर से चली जाती हैं। साथ ही घर के सदस्यों पर आए बड़े से बड़े संकटों सहज ही टल जाते हैं। इसके अलावा यदि जन्मकुंडली या गोचर में शनि, राहु, केतु या अन्य कोई दुष्ट ग्रह बुरा असर दे रहा है तो वह भी सहज ही टल जाता है। शनि की साढ़े साती व ढैय्या में इसका प्रयोग विशेष रूप से किया जाता है।


ऐसे करें सुंदर कांड का पाठ


सुंदरकांड का पाठ विशेष रूप से शनिवार तथा मंगलवार को करने पर सभी संकटों का नाश करता है। परन्तु आवश्यकता होने पर इसका पाठ कभी भी किया जा सकता है। पाठ करने से पहले भक्त को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद किसी निकट के मंदिर अथवा घर पर ही एक चौकी पर हनुमानजी की तस्वीर/ प्रतिमा को विराजमान कर स्वयं एक आसन पर बैठ जाएं।


इसके बाद बजरंग बली की प्रतिमा/ चित्र को सादर फूल-माला, तिलक, चंदन, आदि पूजन सामग्री अर्पण करनी चाहिए। यदि किसी हनुमान मंदिर में कर रहे हैं तो उनकी हनुमान प्रतिमा को चमेली का तेल मिश्रित सिंदूर भी चढ़ा सकते हैं। देसी घी का दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद भगवान श्रीगणेश, शंकर-पार्वती, भगवान राम-सीता-लक्ष्मण तथा हनुमान जी को प्रणाम कर अपने गुरुदेव तथा पितृदेवों का स्मरण करें।


तत्पश्चात हनुमानजी को मन-ही-मन ध्यान करते हुए सुंदरकांड का पाठ आरंभ करें। पूर्ण होने पर हनुमानजी की आरती करें, प्रसाद चढ़ाएं तथा वहां मौजूद सभी लोगों में बांटे। आपके सभी बिगड़े हुए काम तुंरत ही पूरे होंगे।



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