रामनवमी पर ऐसे करें भगवान राम का पूजन, पूर्ण होगी हर इच्छा

रामनवमी का त्योहार चैत्र शुक्ल की नवमी को मनाया जाता है। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है

By: सुनील शर्मा

Published: 15 Apr 2016, 04:40 PM IST

रामनवमी का त्योहार चैत्र शुक्ल की नवमी को मनाया जाता है। रामनवमी के दिन ही चैत्र नवरात्र की समाप्ति भी हो जाती है। हिंदु धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान श्रीराम का जन्म हुआ था अत: इस शुभ तिथि को भक्त लोग रामनवमी के रूप में मनाते हैं। यह पर्व भारत में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन लोग पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य के भागीदार होते हैं।

रामनवमी पूजन
रामनवमी का पूजन शुद्ध और सात्विक रूप से भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन प्रात:काल स्नान इत्यादि से निवृत्त हो भगवान राम का स्मरण करते हुए भक्त लोग व्रत एवं उपवास का पालन करते हैं। इस दिन भगवान राम का भजन एवं पूजन किया जाता है। भक्त लोग मंदिरों इत्यादि में भगवान राम की कथा का श्रवण एवं कीर्तन किया जाता है। इसके साथ ही साथ भंडारे और प्रसाद को भक्तों के समक्ष वितरित किया जाता है। भगवान राम का संपूर्ण जीवन ही लोक कल्याण को समर्पित रहा। उनकी कथा को सुन भक्तगण भाव विभोर हो जाते हैं व प्रभु के भजनों को भजते हुए रामनवमी का पर्व मनाते हैं।

राम जन्म की कथा
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार त्रेतायुग में रावण के अत्याचारों को समाप्त करने तथा धर्म की पुन: स्थापना के लिए भगवान विष्णु ने मृत्युलोक में श्रीराम के रूप में अवतार लिया था। भगवान रामचन्द्र का जन्म चैत्र शुक्ल की नवमी के दिन राजा दशरथ के घर में हुआ था। उनके जन्म पश्चात संपूर्ण सृष्टि उन्हीं के रंग में रंगी दिखाई पड़ती थी। चारों ओर आनंद का वातावरण छा गया था। प्रकृति भी मानो प्रभु श्रीराम का स्वागत करने को लालायित हो रही थी। भगवान श्रीराम का जन्म धरती पर राक्षसों के संहार के लिए हुआ था। त्रेता युग में रावण तथा राक्षसों द्वारा मचाए आतंक को खत्म करने के लिये श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में अवतरित हुए। इन्हें रघुकुल नंदन भी कहा जाता है।

रामनवमी का महत्व
रामनवमी के त्योहार का महत्व हिंदू धर्म सभ्यता में महत्वपूर्ण रहा है। इस पर्व के साथ ही मां दुर्गा के नवरात्रों का समापन भी जुडा़ है। इस तथ्य से हमें ज्ञात होता है कि भगवान श्रीराम ने भी देवी दुर्गा की पूजा अर्चना की थी और उनके द्वारा की गई शक्ति पूजा ने उन्हें धर्म युद्ध में विजय प्रदान की। इस प्रकार इन दो महत्वपूर्ण त्योहारों का एक साथ होना पर्व की महत्ता को और भी अधिक बढ़ा देता है।

कहा जाता है कि इसी दिन गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना का आरंभ भी किया था। रामनवमी का व्रत पापों का क्षय करने वाला और शुभ फल प्रदान करने वाला होता है। रामनवमी के उपलक्ष्य में देश भर में पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। देश के कोने कोने में रामनवमी पर्व की गूंज सुनाई पड़ती है। इस दिन लोग उपवास करके भजन कीर्तन से भगवान राम को याद करते हैं।
सुनील शर्मा
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned