Kharmas 2025: जप तप का महीना मलमास जिसे खरमास भी कहते हैं, इन दिनों चल रहा है। यह महीना 13 अप्रैल को संपन्न होगा। ऐसे में आप जानना चाहते हैं कि खरमास में क्या करना चाहिए या खरमास में क्या दान करना चाहिए तो जानिए ज्योतिषी नीतिका शर्मा से जवाब (Kharmas Me Kya Daan Karna Chahiye)
Kharmas Me Kya Daan Karna Chahiye: ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार एक साल में दो बार एक बार सूर्य के गुरु ग्रह की राशि धनु और फिर मीन राशि में भ्रमण के दौरान लगता है। यह अशुभ समय माना जाता है इसलिए मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं।
लेकिन इस समय पूजा जप तप साधना का विशेष फल मिलता है। विशेष रूप से भगवान सूर्य, भगवान विष्णु और शंकर जी की पूजा से, साथ ही इस महीने में दान का विशेष महत्व है। आइये जानते हैं खरमास में क्या दान करना चाहिए
ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार खरमास में दान करने से तीर्थ स्नान जितना पुण्य फल मिलता है। इस महीने में निष्काम भाव से ईश्वर के नजदीक आने के लिए जो व्रत किए जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है और व्रत करने वाले के सभी दोष खत्म हो जाते हैं।
इस दौरान जरूरतमंद लोगों, साधुजनों और दुखियों की सेवा करने का महत्व है। खरमास में दान के साथ ही श्राद्ध और मंत्र जाप का भी विधान है। आइये जानते हैं विशेष रूप से खरमास में क्या दान करना चाहिए
1.पूजा-पाठ के साथ ही जरूरतमंद लोगों को धन, अनाज, कपड़े, जूते-चप्पल का दान जरूर करें। इससे जीवन में अच्छे परिणाम मिलते हैं।
2. किसी गोशाला में हरी घास और गायों की देखभाल के लिए अपने सामर्थ्य के अनुसार दान कर सकते हैं।
3. घर के आसपास किसी मंदिर में पूजन सामग्री भेंट करें। पूजन सामग्री जैसे कुमकुम, घी, तेल, अबीर, गुलाल, हार-फूल, दीपक, धूपबत्ती आदि।
4. खरमास में लाल कपड़े, गुड़, मूंगफली, काले चने आदि का दान करने से साधक की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है। इससे साधक को धन-वैभव प्राप्त होता है।
5. खरमास को बृहस्पति देव की कृपा प्राप्ति के लिए भी विशेष महीना माना जाता है। इसके लिए पीले रंग की चीजों का दान करना चाहिए।
6. पीतल या स्टील के बर्तनों का दान साधक को पारिवारिक कलह से छुटकारा दिलाकर जीवन में सुख, शांति लाता है।
7. आपके किसी कार्य में बाधा आ रही है, तो ऐसे में आपको केसर का दान करना चाहिए।
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ज्योतिषाचार्य नीतिका शर्मा के अनुसार खरमास में सूर्य पूजा रोज करनी चाहिए। इसके लिए सुबह जल्दी उठें और स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल चढ़ाएं। जल में कुमकुम, फूल और चावल भी डाल लेना चाहिए। सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें।