नवदुर्गाओं का दूसरा रूप मां ब्रह्मचारिणी की पूजा नवरात्रों के दूसरे दिन की जाती है। देवी ब्रह्मचारिणी मां पार्वती का ही रूप है। उन्होंने शिव को पाने के लिए कठिन तपस्या की थी जिसके कारण उन्हें ब्रह्मचारिणी नाम दिया गया।
इनका रूप अत्यन्त मनोहर है और अपने भक्तों की सभी इच्छाएं पूरी करने वाली हैं। मां को चीनी का भोग लगता है और ब्राहमण को भी दान में चीनी ही दी जाती है।
ऐसे करें मां की पूजा
मां के चित्र/ प्रतिमा के सामने पुष्प, दीपक, नैवेद्य आदि अर्पण कर स्वच्छ कपड़े पहने आसन पर विराजमान हो और निम्न मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें-
दधानां करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डल।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
क्या होता है मां ब्रह्मचारिणी की पूजा से
देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से कुंडली में विराजमान बुरे ग्रहों की दशा सुधरती है और व्यक्ति के अच्छे दिन आते हैं। उसके समस्त प्रकार के कष्ट दूर होते हैं और जीवन भर सुख भोग कर अंत में स्वर्ग को प्राप्त करता है।