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अनार, नारियल के भोग से शीघ्र प्रसन्न होती है देवी, देती है मनचाहा वर

देवी संसार का मूल कारण हैं। देवी की कृपा व करूणा से संसार का निर्माण होता है। शिव-शक्ति के मिलन से ही संसार बनता है

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Sunil Sharma

Oct 18, 2015

Maa Durga

Maa Durga

दुर्गा सप्तशती
के अनुसार असुरों का राजा महिषासुर स्वर्ग का राजा बन गया व देवता साधारण मनुष्यों
की तरह धरती पर विचरण करने लगे। तब पराजित देवता ब्रह्मा के साथ भगवान शिव व विष्णु
के पास गए। सारी कथा सुनकर भगवान विष्णु व शिव क्रोधित हो गए और उनके शरीर से तेज
उत्पन्न हुआ। शिव के तेज से देवी का मुख, यमराज के तेज से बाल, विष्णु के तेज से
भुजाएं बनीं। इंद्र से कटि प्रदेश व अन्य देवताओं से देवी का शरीर बना। शिव ने
त्रिशूल, हिमालय ने सिंह, विष्णु ने चक्र व इंद्र ने वज्र देकर देवी को सुशोभित
किया।


अर्द्धनारीश्वर रूप में शिव-शक्ति


देवी संसार का मूल कारण हैं।
देवी की कृपा व करूणा से संसार का निर्माण होता है। शिव-शक्ति के मिलन से ही संसार
बनता है। वे परस्पर एक-दूसरे की तपस्या के फल हैं। वे शिव व शक्तिसंसार रूपी
प्रपंच के माता-पिता हैं। असल में वे दो नहीं बल्कि एक संवत्सर की पूर्णता हैं।
देवी शिवमय व शिव देवीमय हैं। मानवमात्र की सृष्टि रचना में यही स्वरूप अभीष्ट हैं-
दाम्पत्य में यही भाव भारतीय चिंतन का विश्व को अवदान है।


भोग में नारियल व
अनार का महत्व


देवी पूजन में अनेक पदार्थो का महत्व है। पूजा करते समय देवी को
स्नान, चंदन, वस्त्र व गुड़-पताशे इत्यादि चढ़ाए जाते हैं लेकिन इनमें भी दो
वस्तुएं माता को विशेष प्रिय हैं। अखंड फल होने के कारण देवी पूजन में श्रीफल
(नारियल) अवश्य चढ़ाना चाहिए क्योंकि यह बारह महीने का फल है। "
दुर्गासप्तशती
" के
अनुसार देवी को सारे फलों में भी दाडिम (अनार) अत्यंत प्रिय हैं।


जागरण से
दूर होते हैं दुख


शारदीय नवरात्र
के मौके पर माता दुर्गा को प्रसन्न करने के
लिए रात्रि में भजन-कीर्तन करने का चलन है। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार नवरात्र
में रात्रि जागरण (जागने) का विशेष महžव है। देवी भागवत पुराण के अनुसार जो भक्त
नवरात्र के नौ दिन रात्रि में जागकर देवी का ध्यान करता है वह अनेक साधन-सिद्धियों
को पाकर दुखों से मुक्त हो जाता है। नवरात्र के दौरान रात्रि में विशेष पूजन करने
का भी प्राचीन विधान हैै।