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385 साल पुराने ताजमहल को लगा अजीब रोग

आगरा किला और ताजमहल के बीच मार्ग पर वाहन ही वाहन होते हैं। समस्या विकट है।

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Sujeet Verma

Jan 05, 2016

आगरा. 385 साल पुराने ताजमहल को अजीब रोग लग गया है। इसका इलाज आसान नहीं है। इस रोग के कारण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) तथा ताजगंज पुलिस पर आफत आ गई है। यह है ‘भीड़ रोग’। इसका निदान ढूंढने का प्रयास किया जा रहा है। केन्द्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा तक चिन्तित हैं। आशंका प्रकट की जा रही है कि अगर तत्काल इलाज न किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

शनिवार और रविवार को आफत
शनिवार, रविवार और अन्य छुट्टियों में ताजमहल की आफत आ जाती है। 80 हजार तक का आंकड़ा पहुंच चुका है। ताजमहल तो बड़ा है, लेकिन इतने पर्यटकों को सुरक्षा जांच के साथ प्रवेश कराना मुश्किल है। ताजमहल में प्रवेश के तीन ही द्वार हैं। हर पर्यटक की जांच होती है। समय लगता है। इससे पहले टिकट के लिए मारामारी रहती है। वहां भी लम्बी लाइन। उकता जाते हैं पर्यटक। क्रिसमस की छुट्टी में तो टिकट लेने के बाद भी पर्यटक ताजमहल नहीं देख सके थे।

80 हजार तक पर्यटक पहुंचे

दो जनवरी को शनिवार था। उस दिन ताजमहल में 43264 टिकट बिके। तीन जनवरी को रविवार था। उस दिन 37819 टिकट बिके। 15 साल तक के बच्चों का प्रवेश निःशुल्क है। अनुमान लगाया जा रहा है कि शनिवार को 80 हजार और रविवार को करीब 70 हजार पर्यटक पहुंचे। इतनी भीड़ को नियंत्रित कर पाना आसान नहीं है।

पार्किंग और यातायात की समस्या
अधिकांश पर्यटक अपने वाहनों से आते हैं। ऐसे में पार्किंग की खासी समस्या हो जाती है। पश्चिमी गेट पर तो हाल यह है कि सड़क पर, मोतीलाल नेहरू पार्क, पुरानी मंडी रोड पर पार्किंग हो रही है। अम्बेडकर पुल से आने वाले वाहन यमुना किनारा मार्ग पर जाम में फंस जाते हैं। श्मशान घाट की ओर जाना मुश्किल हो जाता है। आगरा किला और ताजमहल के बीच मार्ग पर वाहन ही वाहन होते हैं। समस्या विकट है।

पासपोर्ट कार्यालय की तरह हो इन्तजाम
एएसआई अधिकारियों के मुताबिक, ताजमहल को भीड़ रोग से मुक्त करने के लिए जरूरी है कि टिकट पर समय अंकित हो। पासपोर्ट कार्यालय जाएं, तो पहले से ही सबका समय तय होता है। इस कारण न लम्बी लाइन लगती है और न ही इन्तजार करना पड़ता है। इसके लिए जरूरी है कि पर्यटक घर से ही ऑनलाइन टिकट लेकर चलें। विदेशों में ऐसा ही सिस्टम है। इसका लाभ यह होगा कि टिकटघर खाली हो जाएगा। प्रवेश द्वार पर भीड़ एक साथ न जाकर टुकड़ों में जाएगी। ताजमहल के रात्रिकालीन दर्शन में भी 50-50 के समूह में पर्यटक लाए जाते हैं। सुझाव दिया गया है कि टूर ऑपरेटर्स को ऑनलाइन टिकट खऱीदने का प्रचार करना चाहिए। माई ट्रिप का भी सहयोग लिया जा सकता है।

ऑनलाइन टिकट अच्छा उपाय
इस बारे में पूछे जाने पर एएसआई के अधीक्षण पुरातत्वविद डॉ. भुवन विक्रम ने बताया कि भीड़ के कारण समस्या तो है। अगर पर्यटक ऑनलाइन टिकट लेकर चलता है तो समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है। अधिकांश पर्यटक 3 बजे के बाद आते हैं। ताजमहल को खोलने का समय नहीं बढ़ाया जा सकता है। सूर्योदय से पूर्व और सूर्यास्त के बाद कुछ दिखाई ही नहीं देगा।