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चाय की चुस्की, इतनी रिस्की…यदि आप भी पीते हैं तो हो जाएं सावधान

आंखो देखी इस अनदेखी से न जाने कितने लोग जाने-अनजाने में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे है।

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आगर मालवा. शहर के किसी भी कौने में चले जाओ तो कहीं न कहीं होटलों पर प्लास्टिक के कप में चाय की चुस्कियां लेते हुए लोग नजर आ ही जाते है लेकिन लोगो को यह पता नही होता है कि चाय की इन चुस्कियों के साथ-साथ वे गंभीर बिमारियों को भी न्यौता दे रहे है। आंखो देखी इस अनदेखी से न जाने कितने लोग जाने-अनजाने में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे है। ठीक इसी प्रकार की स्थिति इन दिनों रेस्टोरेंटो पर भी दिखाई देती है। गरमा गरम सब्जी को रेस्टोरेंट के कर्मचारी पॉलीथिन में पैक कर देते है यह भी सेहत के लिए हानिकारक साबित होता है। डॉक्टरों के अनुसार गर्म पदार्थ प्लास्टिक के सम्पर्क में आने से जहर का काम करने लगता है।

नगर पालिका द्वारा निरंतर अभियान चलाने के बावजूद शहर में प्लास्टिक से बने डिस्पोजल के उपयोग व उपभोग पर कोई खासा असर दिखाई नही दे रहा है। आम जनमानस जानकारी के अभाव में अभी भी प्लास्टिक के डिस्पोजल मे सामग्री का सेवन कर रहे है। शहर की यदि बात की जाए तो यहां चाय पीने वालो की कोईकमी नही है। किराना व्यापारियों के अनुसार शहर में लगभग १०० टन चाय की खपत मासिक होना बताया जाता है। हर व्यक्ति दिन में औसतन ५ ग्राम चाय पी जाता है। इनमें से अधिकांश लोग अमुमन होटलों पर ही चाय की चुस्की लेते रहते है। होटलों पर डिस्पोजल का प्रचलन इतना अधिक हो चुका है कि अधिकांश होटल संचालको ने अपनी-अपनी दुकानों से कांच के ग्लास तो गायब ही कर दिए है। ग्राहक आया नही कि उसे प्लास्टिक के डिस्पोजल में चाय थमा दी जाती है। प्लास्टिक के कप अथवा डिस्पोजल सेहत के लिए तो खतरनाक है ही साथ ही पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक साबित हो रहे है। चाय पीने के बाद डिस्पोजल को इधर-उधर फेंक दिया जाता है जो की मवेशियों के लिए भी घातक साबित होता है।

लिवर एवं किडनी केंसर की बड़ती है संभावना
डॉक्टरों का तो खुला कहना है कि पॉलीथिन या डिस्पोजल में कोई गर्म सामग्री डाली जाती है तो उससे होने वाली रसायनिक क्रिया से वह गर्म सामग्री एक प्रकार से जहर में तब्दिल हो जाती है। लगातार सेवन करने से किडनी व लिवर के केंसर की आशंका बड़ जाती है। इसका विकल्प मिट्टी के कुल्हड़ और पेपर मग हो सकते है। थरमाकोल से बने मग भी सेहत के लिए नुकसानदायक है इनका उपयोग भी न किया जाए। थरमाकोल के मग को तैयार करने के लिए मोम का उपयोग होता है जो की गर्म सामग्री के सम्पर्क में आते ही पिघल जाता है। मिट्टी के कुल्हड़ अपेक्षाकृत महंगे होने के कारण दुकानदार इसका उपयोग करने से बचते है और आम लोगो को इस खतरे में धकेल देते है।

पर्यावरण को भी है नुकसान
प्लास्टिक डिस्पोजल से निकलने वाले मेट्रोसेमिन के कारण केंसर की आशंका बढ़ जाती है जबकि अन्य केमिकल के कारण हार्मोनल इनबैलेंस, अल्सर और किडनी तथा लिवर से संबंधित बिमारियों का खतरा बढ़ जाता है। प्लास्टिक मटेरियल मे जब गर्म पदार्थ डाला जाता है तो मेट्रोसेमिन सहित कईप्रकार के कैमिकल गर्म पदार्थ में घुल जाते है। इससे लिवर और किडनी डेमेज होने की आशंका रहती है। प्लास्टिक के कप नस्ट नही होते है जो की सीधे-सीधे पर्यावरण के लिए भी नुकसानदायक साबित होते है।

''प्लास्टिक के कप में या डिस्पोजल में चाय पीने पर मेट्रोसेमिन, बिस्फिनोल ए और बर्ड इथाईल डेक्सिन नामक कैमिकल हमारे शरीर में पहुंचते है जो शरीर के लिए बहुत ही अधिक नुकसानदायक है बच्चों और गर्भवति महिलाओं के लिए यह खतरा ओर अधिक बढ़ जाता है धीरे-धीर मनुष्य के समझने की शक्ति भी कम हो जाती है इस संबंध में सभी को जागरूक होना होगा होटल वाले उपयोग न करें और आम लोग इसका उपभोग न करें- डॉ शशांक सक्सेना,

चिकित्सक जिला अस्पताल आगर
''नगर पालिका द्वारा शहर के सभी व्यापारियों, होटल संचालको आदि लोगो को समझाईश दी जा चुकी है और डिस्पोजल व प्लास्टिक की पॉलीथिन का उपयोग न करने का अनुरोध किया जा चुका है साथ ही पॉलीथिन पर पूर्णत: प्रतिबंध भी लगा रखा है अब जुर्माने की कार्रवाई की जाएगी प्लास्टिक डिस्पोजल एवं पॉलीथिन आम जनमानस के लिए वैसे भी हानिकारक है इसका उपयोग नही करना चाहिए- सीएस जाट, सीएमओ नपा आगर