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साध्वी बनने के बाद पहली बार सांसारिक घर पहुंची और परिजनों से कही यह बात, देखें वीडियो

नगर की बेटी व नूतन दीक्षित साध्वी सिद्धमपूर्णा दीक्षा अंगीकार करने के बाद प्रथम बार अपने सांसारिक घर पर पगलिया करने पहुंचीं। यहां परिजनों ने साध्वी मंडल की अगवानी की। इसके बाद प्रथम प्रवचन में कहा दीक्षा अंगीकार करने के बाद प्रथम बार गुरु मां के सांसारिक घर आई हूं। एक ही रात्रि में महसूस हो गया कि संसार में कभी खुशी, कभी गम है, जबकि संयम हर पल आनंद ही आनंद है।

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नलखेड़ा. नगर की बेटी व नूतन दीक्षित साध्वी सिद्धमपूर्णा दीक्षा अंगीकार करने के बाद प्रथम बार अपने सांसारिक घर पर पगलिया करने पहुंचीं। यहां परिजनों ने साध्वी मंडल की अगवानी की। इसके बाद प्रथम प्रवचन में कहा दीक्षा अंगीकार करने के बाद प्रथम बार गुरु मां के सांसारिक घर आई हूं। एक ही रात्रि में महसूस हो गया कि संसार में कभी खुशी, कभी गम है, जबकि संयम हर पल आनंद ही आनंद है।


नगर में आयोजित पांच दिनी दीक्षा समारोह के समापन के बाद रविवार सुबह 7 बजे साध्वीश्री सिद्धमपूर्णा आराधना भवन से गाजे-बाजे तथा ढोल-ढमाकों के साथ खंडेलवाल कंपाउंड स्थित निवास पर अमिपूर्णा श्रीजी साध्वी मंडल के साथ पगलिया करने पधारीं। यहां परिजनों ने अगवानी कर केसर-कुमकुम से सफेद वस्त्र पर पगलिया करवाया।
साध्वी अमीदर्शाश्रीजी ने कहा दीक्षा कार्यक्रम लेकर आप सभी ने ध्यये बनाया था कि कुछ भी हो हमें संयमी की दीक्षा अच्छे से अच्छे करवाना है। इसके लिए आपने पूरी लगन व मेहनत की। उसी का फल है कि नगर में संपन्न दीक्षा का यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बन गया है। नूतन दीक्षित साध्वी सिद्धमपूर्णा ने रविवार को अपने निवास पर प्रथम प्रवचन में कहा दीक्षा अंगीकार करने के बाद प्रथम बार गुरु मां के सांसारिक घर आई हूं। एक ही रात्रि में महसूस हो गया कि संसार में कभी खुशी, कभी गम है, जबकि संयम हर पल आनंद ही आनंद है। प्रथम बार सांसारिक घर आई हूं तो कुछ न कुछ गिफ्ट के रूप में त्याग का नियम जरूर लें। रात्रि भोजन का त्याग, कंदमूल का त्याग, परमात्मा की पूजा, देवदर्शन या कोई भी अन्य त्याग का नियम ले सकते हैं। यही आपकी ओर से मुझे गिफ्ट होगी। साध्वी रविवार को समाज के अन्य घरों पर भी पगलिया करने पहुंचीं।


समाज सहित अन्य समाजजनों ने लिए त्याग के नियम
संयमी तिलगोता द्वारा जैन दीक्षा अंगीकार करने के बाद उनके संयम जीवन की अनुमोदना के रूप में बड़ी संख्या में समाज सहित अन्य समाज के लोगों के साथ अन्य स्थानों से आए समाजजनों ने जीवन में इस दीक्षा के निमित्त कुछ न कुछ त्याग करने का नियम लिया। लोगों ने रात्रि भोजन के साथ कंदमूल, मिठाई का त्याग किया गया तो किसी ने परमात्मा पूजा, जीवदया के नियम के साथ प्रिय वस्तुओं का त्याग करने का नियम लिया।


साध्वी मंडल का मंगल विहार आज
साध्वीश्री अमीपूर्णा श्रीजी के साथ नूतन दीक्षार्थी साध्वी सिद्धमपूर्णा श्रीजी का सोमवार दोपहर 3 बजे हनुमान मंडी जैन उपाश्रय से गाजे-बाजे के साथ लालूखेड़ी के लिए विहार होगा। यहां से अगले दिन सुसनेर विहार होगा। नूतन दीक्षित साध्वी के प्रथम मंगल विहार में समाजजनों के साथ नगरवासी भी बड़ी संख्या में उनके साथ लालूखेड़ी तक पैदल विहार करेंगे। दीक्षा समारोह में भाग लेने के लिए पधारी साध्वी अर्चपूर्णाश्रीजी का मंगल विहार रविवार शाम सुईगांव के लिए हुआ।