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राजनीति में कॅरियर बनाने वालों को शिक्षित-प्रशिक्षित होना जरूरी

पत्रिका जन प्रहरी कार्यक्रम में रखी बेबाकी से राय, बोले- बदलाव लाएंगे, खुद कर रहे पहलभोपाल. राजनीति में बेहतर नेतृत्व निर्माण के लिए शुरू किए गए ‘पत्रिका जनप्रहरी’ अभियान के तहत राजधानी में लगातार अलग-अलग वर्गों के साथ संवाद किया जा रहा है। इसी तारतम्य में बुधवार को बरखेड़ा महात्मा गांधी चौराहा स्थित हेवु भारतीय मजदूर संघ यूनियन कार्यालय में ‘पत्रिका जनप्रहरी’ अभियान का आयोजन किया गया। इसमें यूनियन के पदाधिकारियों के साथ भेल कर्मचारियों ने स्वच्छ और साफ-सुथरी राजनीति की शपथ ली। इन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में ईमानदार, युवा सशक्त, साफ छवि व योग्य प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे। हम सभी इसका संकल्प लेते हैं। खुद के साथ ही संगठन के माध्यम से लोगों को जागरूक करेंगे।

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आपराधिक छवि के लोगों को न मिले टिकट
यदि कोई आपराधिक प्रवृत्त का है, अपराधी है, उसके खिलाफ थाने में अपराध दर्ज है या फिर कोर्ट तो केस चल रहा है तो किसी भी पद के लिए राजनीतिक पार्टियों को टिकट नहीं देना चाहिए। भारतीय संविधान के तहत उसे सजा मिलनी चाहिए। मौजूदा परिवेश में राजनीति को दलदल समझा जाता है। अच्छे लोगों को राजनीति में आना चाहिए।

हायर एजुकेशन और प्रशिक्षण जरूरी
नेताओं के लिए हायर एजुकेशन के साथ प्रशिक्षित होना जरूरी है। तभी वे लोगों की भावनाओं को समझ सकेंगे और उनकी मदद कर सकेंगे। आमजन को राजनीति में आने के लिए बैकग्राउंड तैयार करना होगा। उसे अच्छा कार्यकर्ता और समाज सेवी बनना होगा। राजनीतिज्ञों को हर विषय की बेहतर जानकारी होनी चाहिए। समाज के हर वर्ग की समझ होनी चाहिए, तभी आप समाज सेवा करने के साथ ही लोगों की मदद कर पाएंगे। टेक्नालॉजी के इस युग में राजनीति को अपना कॅरियर बनाने के लिए शिक्षित और प्रशिक्षित होना बेहद जरूरी है। बिना शिक्षा और प्रशिक्षण के आगे बढऩा बेहद मुश्किल है।

धन-बल वाले परिवार ही आ पाते हैं आगे
चुनाव खर्चीला होने के कारण धन बल वाले परिवार के युवा, महिलाएं आगे आ पाती हैं। आम आदमी यहां तक पहुंच ही नहीं पाता। पार्टियें का भी सोचना होता है कि जो व्यक्ति पैसा खर्च करने वाला हो उसे ही टिकट दें, ताकि वे चुनाव में पैसा खर्च कर चुनाव जीत सके। चुनाव में ज्यादा पैसा खर्च करने के साथ ही वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए आपराधिक प्रवृत्त के लोगों को साथ में रखते हैं। ऐसे में चुनाव जीतने के बाद यही लोग समाज के लोगों के लिए दुखदायी होते हैं। और राजनीति को अपराधीकरण की ओर ले जाते हैं। पारिवारिक समस्याओं के साथ राजनीतिक बैकग्राउंड का नहीं होना भी बड़ा कारण है।

राजनीति में आने से पहले देश के प्रति हमारी विचारधारा तय होनी चाहिए कि हम देश के हित में पब्लिक के हित में क्या बेहतर कर सकते हैं। देश, प्रदेश, समाज और अपने क्षेत्र के विकास के हित में काम करते हुए हमें राजनीति में आगे बढऩा चाहिए। वेदीलाल श्यामकर, कर्मचारी भेल, बीएमएस यूनियन

महिलाओं को राजनीति में आने में सबसे बड़ी बाधा परिवार, समाज और सामाजिक ताना-बाना बनता है। वहीं युवाओं को वंशवाद का शिकार होना पड़ता है। मौजूदा समय में युवाओं को राजनीति में आने के लिए धन की जरूरत होती है। ऐसे में जिनका परिवार पहले से राजनीति में सक्रिय है उन्हीं के परिवार के लोग चाहे युवा हो या फिर महिला ओ आगे आ आती है। राकेश कोल, कर्मचारी भेल, बीएमएस यूनियन

राजनीतिक पार्टियां मुफ्त की सामग्री देना बंद कर विकास पर ध्यान दें। क्षेत्र के लोगों को सडक़, पानी, बिजली साफ-सफाई बेहतर तौर पर मिल सकेंगी। क्षेत्र का भी विकास होगा। अमित सनौठिया, कर्मचारी भेल

राजनीति जनसेवा का सबसे बड़ा हथियार है। राजनीति में आने वाले लोगों के साथ ही पहले से राजनीति कर रहे लोगों को हमारे देश के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की तरह एक देश, एक विचारधारा के तहत काम करते हुए राजनीति के माध्यम से देश की सेवा करनी चाहिए। संतोष अहिरवार, कर्मचारी भेल, बीएमएस यूनियन

राजनीतिज्ञों को लोगों को प्रलोभन देना बंद करना चाहिए। सरकार को भी मुफ्त में दी जा रही बिजली, पानी को बंद करना चाहिए, ताकि लोग प्रलोभन के कारण नहीं, बल्कि स्वच्छ समाजसेवी और बेदाग छवि के नेता को प्रतिनिधि के तौर पर चुनें। महेंद्र सिंह भदौरिया, कर्मचारी भेल, बीएमएस यूनियन

राजीति में आने वाले लोगों को अपने देश, प्रदेश और क्षेत्र का ख्याल रखना चाहिए। समाजों के तौर तरीके पता होने चाहिए। लोगों की भावनाओं को समझना चाहिए। क्षेत्र का जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र का विकास करने वाला और लोगों का ख्याल रखने वाला होना चाहिए। ओम प्रकाश जैसवार, कर्मचारी भेल, बीएमएस यूनियन