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श्रीराम को जूठे बैर खिलाने वाली आदिवासियों की आराध्या देवी की ऐसे मनाई जयंती

शबरी जयंती पर भिलाला युवा संगठन ने शोभायात्रा निकाली। यात्रा तहसील चौराहे से शुरू हुई। इसमें भगवान श्रीराम को झूठे बैर खिलाते शबरी की झांकी के साथ एक सुसज्जित रथ पर शबरी का चित्र था।

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नलखेड़ा. शबरी जयंती पर भिलाला युवा संगठन ने शोभायात्रा निकाली। यात्रा तहसील चौराहे से शुरू हुई। इसमें भगवान श्रीराम को झूठे बैर खिलाते शबरी की झांकी के साथ एक सुसज्जित रथ पर शबरी का चित्र था। युवा वर्ग डीजे व तासे की थाप पर थिरक रहे थे। यात्रा का जगह-जगह स्वागत हुआ। यात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए बगलामुखी मंदिर पहुंची। यहां शबरी माता की पूजा-अर्चना के बाद महाप्रसादी बांटी गई। समाज की प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया। भिलाला समाज युवा संगठन के जिला प्रवक्ता प्रेम भिलाला ने बताया आदिवासियों की आराध्य देवी माता शबरी का जन्मोत्सव संगठन समाजजनों के सहयोग से तीन वर्षों से मना रहा है। इसमें आसपास व दूरदराज से बड़ी संख्या में सामाजिक बंधु भाग लेते हैं।

धूमधाम से मनाई रविदास जयंती
डोंगरगांव. साल्याखेड़ी में मेघवाल समाज ने संत शिरोमणि रविदास गुरु महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई। चल समारोह एवं एक शाम रविदास के नाम भजन संध्या का आयोजन हुआ। मुख्य वक्ता क्रांतिकारी संत सत्यानंद महाराज ने समाज को मार्गदर्शित किया व भजन गायक कलाकार बाबूलाल रागोटा ने भजनों की प्रस्तुतियां दी। मुख्य अतिथि विधायक राणा विक्रमसिंह, अजाक्स जिलाध्यक्ष मोहनलाल दर्शनिया, रमेशचंद्र वर्मा मौजूद थे। राणा ने संतश्री के जीवन पर प्रकाश डाला और उपस्थित लोगों से समाज में फैली कुरीतियों को समाप्त करने के साथ विद्यार्थियों को पढ़ाने पर जोर दिया। संचालन राधेश्याम सूर्यवंशी ने किया। आभार भेरूलाल मेघवंशी ने माना।

एक शाम शहीदों के नाम में दिखी देशभक्ति
नलखेड़ा. नगर में स्थित चौक बाजार में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में शहीद हुए जवानों को मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि दी गई। श्री खेड़ापति सुंदरकांड समिति के तत्वावधान में रविवार को नगर के विभिन्न सामाजिक संगठनों के सहयोग से एक शाम शहीदों के नाम राष्ट्रीय गीतों पर आधारित एक आयोजन किया गया। बाहर से आए कलाकारों द्वारा आकर्षक देशभक्ति गीतों पर प्रस्तुतियां दी गईं।

ब्रज की रज के कण-कण में है प्रभु का वास
डोंगरगांव. पीपल्याखेड़ा बालाजी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस आचार्य देवेंद्रकृष्ण शास्त्री के मुखारविंद से श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का बहुत ही सुंदर वर्णन हुआ। इसमें भगवान ने ब्रज की रज पाकर ब्रजरज का महत्व बताते हुए कहा ब्रज की रज के कण कण में भगवान राधा-श्रीकृष्ण का वास है। मनुष्य को जीवन में एक बार ब्रज की यात्रा अवश्य करना चाहिए जिससे उसके सारे कष्टों और दु:खों का निवारण होता है। मनुष्य को भगवान श्रीराधा-कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ कालिया मर्दन, चीरहरण, माखन चोरी एवं अंत में श्री गोवर्धन पूजन का महत्व बताया। इसमें बताया कि किस प्रकार इंद्र का अहंकार नष्ट कर भगवान ने ब्रजवासियों को इंद्र के कोप से बचाया था।

वाचक पंडित सत्यनारायण शास्त्री राधे-राधे पिपल्या कुल्मी का आगमन हुआ। कथा वाचक पं. देवेंद्र शास्त्री व समिति अध्यक्ष सहित उपस्थित भक्तों ने उनका स्वागत किया। उपस्थित भक्तों के आग्रह पर श्री राधे-राधे शास्त्री ने सत्संग की महिमा सुनाते हुए कहा कि यहां अपना कोई नहीं है जी सिवाए हरि को छोड़ के। पांडाल मे नृत्य करने की होड़ लग गई। आज रुक्मणी मंगल का प्रसंग सुनाया जाएगा।