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इस कॉलेज की अतिथि शिक्षक लगा रहे नैया पार

प्रदेश में शिक्षा का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में काफी नीचे गिर रहा है। सरकार बड़ी राशि खर्च करने का दावा भी करती है

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प्रदेश में शिक्षा का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में काफी नीचे गिर रहा है। सरकार बड़ी राशि खर्च करने का दावा भी करती है

सुसनेर. प्रदेश में शिक्षा का स्तर अन्य राज्यों की तुलना में काफी नीचे गिर रहा है। सरकार बड़ी राशि खर्च करने का दावा भी करती है और गांव व कस्बों में बेहतर शिक्षा मुहैया कराने के दावे किए जाते हैं, लेकिन जब सच्चाई टटोली जाती है तो धरातल पर कुछ और ही दिखता है। शासन संभाग स्तर पर संचालित हो रहे सरकारी कॉलेजों में तो पूरा स्टाफ रखता है, दूसरी और 34 साल पुराने सुसनेर के शा. स्वामी विवेकानंद कॉलेज को आज तक पूरा स्टाफ नहीं मिला। शासन ने पद तो स्वीकृत किए है किंतु नियुक्ति नहीं की। ऐसे में सालों से विद्यार्थियों की पढ़ाई अतिथि विद्वानों के भरोसे चल रही है। उच्च शिक्षा विभाग ने 1984 में सुसनेर में कॉलेज शुरू किया था। तीन दशक बीत जाने के बाद भी विभाग कॉलेज को न तो स्थायी प्राचार्य उपलब्ध करा पाया है और ना ही सहायक प्राध्यपकों के रिक्त पडे 11 पदों पर नियुक्तियां हुई। एक लाइब्रेरियन का पद भी रिक्त है।
प्रवेश के बाद बनती है छात्रों में असमंजस की स्थिति
कॉलेज में पढऩे वाले विद्यार्थियों के सामने हर साल उस समय असमंजस की स्थिति पैदा होती है। जब वे प्रवेश ले चुके होते हैं। तब तक उन्हें यह भी पता नहीं होता है कि उन्हें पढ़ाएगा कौन। ऐसे में उनके मन में यह संकोच रहता है की एडमिशन तो ले लिया किंतु जब कॉलेज में कोई प्राध्यापक ही नहीं है तो हमें पढ़ाएगा कौन। आज भी कॉलेज एक ही प्रभारी प्राचार्य के भरोसे है। हर साल प्रवेश प्रक्रिया के बाद विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए जो प्राध्यापक नहीं होते हैं उनकी नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन बुलाए जाते हैं। उसके बाद विवि के निर्देशानुसार अतिथि विद्वान रखे जाते हैं। तब शिक्षा सत्र के 3 माह बीत चुके होते हैं। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित होती है। कॉलेज अतिथियो के भरोसे होने से ज्यादातर छात्र अपने स्तर पर संसाधन जुटाकर पढ़ाई करते है।
ये हैं पद जिन पर होना हैं नियुक्तियां, कुल 24 पद रिक्त
प्राचार्य 01
सहायक प्राध्यापक 11
प्रयोगशाला टेक्निशियन 04
प्रयोगशाला परिचालक 04
लाइब्रेरियन 01
मुख्य लिपिक 01
सहायक ग्रेड 2 01
सहायक ग्रेड 3 01
हर साल मांग करते हैं
हर साल शासन से सहायक प्राध्यापकों व अन्य पदों पर नियुक्ति हेतु पत्र भेजकर मांग की जाती है, लेकिन नियुक्ति नहीं होती है। ऐसे में अतिथि विद्वानों से काम चलाना पड़ता है।
डॉ. जीसी गुप्ता, प्रभारी प्राचार्य स्वामी विवेकानंद कॉलेज सुसनेर