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14 सितंबर हिन्दी दिवस विशेष : अगर हिंदी मां है तो मौसी है उर्दू…

जानें हिंदी और उर्दू भाषा के मेल-मिलाप की कहानी और हिंदी दिवस की शुरुआत का इतिहास।

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आगरा

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suchita mishra

Sep 13, 2017

14 सितंबर हिन्दी दिवस

14 सितंबर हिन्दी दिवस

अक़्ल, अगर, अजीब, अफ़सोस, आज़ाद, किताब, ज़िंदगी, कोशिश, कागज़, गु़स्सा, चाक़ू, जुर्माना और न जाने कितने ऐसे शब्द हैं जिनका प्रयोग हम रोजाना अपनी बोलचाल में करते हैं, लेकिन हमें इस बात की जानकारी नहीं होती कि ये शब्द आखिर आए कहां से हैं। दरअसल ये शब्द उर्दू के हैं, लेकिन ये हिंदी भाषा के साथ ऐसे मिल गए हैं कि इनका अंतर कर पाना भी मुश्किल हो जाता है। दूध और पानी के मेल की तरह उर्दू और हिंदी भाषा का मेल हमें यही बताता के कि ये एक ही परिवार का हिस्सा हैं। हिंदी अगर हमारी मां है तो उर्दू हमारी मौसी है। दोनों का साथ हमारी मातृभाषा को समृद्ध और सशक्त बनाता है। हिंदी दिवस के मौके पर ये लाइनें लिखते हुए मुझे मुनव्वर राणा का एक शेर याद आ रहा है कि गले लग जाता हूं मां के, तो मौसी मुस्कुराती है, मैं उर्दू में ग़ज़ल कहता हूं, तो हिंदी मुस्कुराती है।

हिंदी और उर्दू के मेल से बना हिंदुस्तान
आपको बता दें कि हिंदी के आधुनिक साहित्य की रचना खड़ी बोली में हुई। खड़ी बोली हिंदी में अरबी-फारसी के मेल से जो भाषा बनी वह 'उर्दू' कहलाई। कई भाषाविद् आज भी हिन्दी और उर्दू को एक ही भाषा मानते हैं। हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखी जाती है और शब्दावली के स्तर पर ज्यादातर संस्कृत के शब्दों का प्रयोग करती है। वहीं उर्दू को उर्दू लिपि में लिखा जाता है और शब्दावली के स्तर पर उस पर फ़ारसी और अरबी भाषाओं का प्रभाव अधिक है। यहां तक कि हमारे देश भारत का दूसरा नाम हिंदुस्तान भी हिंदी और उर्दू भाषा का ही समन्वय है। हिंदी—उर्दू का ये मिलाप भारत की धर्मनिरपेक्षता का पर्याय है।

जानें हिंदी दिवस का इतिहास
अब हम आते हैं हिंदी दिवस पर। क्या आप जानते हैं कि पहली बार हिंदी दिवस कब मनाया गया था? चलिए हम आपको बताते हैं कि पहला आधिकारिक हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 को मनाया गया था। दरअसल आजादी के बाद सविंधान के अलावा देश की आधिकारिक भाषा एक अहम मुद्दा था। समूचे उत्तर भारत और पश्चिम भारत में हिंदी भाषा काफी लोग समझते और बोलते थे। हालांकि दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर भारत में लोग इसका प्रयोग बेहद कम ही करते थे। फिर भी काफी विचार-विमर्श के बाद इस सहमति के साथ हिन्दी को आधिकारिक भाषा चुना गया कि सरकार इसका प्रचार प्रसार पूरे देश में करेगी। लेकिन जब अंग्रेजी भाषा को आधिकारिक तौर पर हटाने की बात आई तो कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया। उसके बाद संविधान में संशोधन करके हिंदी के साथ अंग्रेजी को भी देश की आधिकारिक भाषा बनाए रखने के प्रस्ताव को पारित किया गया। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने देवनागरी लिपि में लिखी हिन्दी को अंग्रेजी के साथ राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था। बाद में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू सरकार ने इस ऐतिहासिक दिन के महत्व को देखते हुए हर साल 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया।

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