13 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बिट्रिश फौज के छक्के छूटे गए थे, मारे गए थे अंग्रेज

इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि भारतीय सैनिकों के हाथों अंग्रेजों को पराजय का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने अपनी किताबों में भी इसका जिक्र किया

2 min read
Google source verification

image

Abhishek Saxena

Aug 09, 2017

1857

1857

आगरा। 1857 की मेरठ से जो चिनगारी शुरू हुई थी, वो देश भर में फैली थी। आगरा भी सन 1857 की क्रांति का गवाह बना था। जंगे आजादी में अंग्रेज पलटनों को यहां करारी टक्कर मिली थी। शाहगंज के सुचेता गांव में हिंदुस्तानी सिपाहियों से हुई जंग में 41 अंग्रेज मारे गए थे।

इतिहासकार राजकिशोर राजे बताते हैं कि भारतीय सैनिकों के हाथों अंग्रेजों को पराजय का सामना करना पड़ रहा था। उन्होंने अपनी किताबों में भी इसका जिक्र किया है। उनका कहना है कि शाहगंज के सुचेता गांव को अंग्रेज अपने नियंत्रण में लेना चाहते थे। लेकिन, यहां पर भारतीय सिपाहियों ने अपना कब्जा जमा लिया था। करीब 40 हजार भारतीय सिपाही थे। पांच जुलाई 1857 को नीमच से भारतीय सिपाहियों के आगरा आने की खबर लगने पर ब्रिगेडियर पोलवेल ने हमला करने की योजना बनाई थी।

18 घुड़सवार मारे गए

राजकिशोर राजे ने तवारीख ए आगरा, मोहल्ले आगरा के में सन 1857 की लड़ाई के बारे में बखूबी लिखा है। उन्होंने लिखा है कि अंग्रजों ने जब सुचेता गांव पर हमला किया था। तब भारतीय सिपाहियों के पास 11 तोपें और 1500 सैनिक थे। अंग्रेजों की बारूद से भरी बैलगाड़ी में भारतीय सैनिकों ने आग लगा दी थी। इसके बाद मेजर प्रेडरगास्ट अपने 200 घुड़सवारों को लेकर लड़ने गया, लेकिन 18 घुड़सवार मारे गए।

अंग्रेजों के पास थी इतनी सेना
बताते हैं कि गोरों के पास 568 सिपाही, 69 तोपें थीं। दोपहर करीब दो बजे युद्ध के लिए गोरों ने हिंदुस्तानी सिपाहियों पर हमला किया। लड़ाई छिड़ गई। अंग्रेज अफसर डि लॉयली और लैंब मारे गए। कैप्टन पीयरसन की तोप का बुरा हाल कर दिया गया। हार देखकर पोलवेल ने फौज को वापस आने के लिए आदेश दिया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। हिंदुस्तानी सैनिकों ने अंग्रेजों सैनिकों पर तोप में तांबे के सिक्के भरकर दागे। इस लड़ाई में 41 अंग्रेज मारे गए और सौ के करीब घायल हुए। इतिहासकार बताते हैं कि दूसरा युद्ध सुचेता गांव में हुआ था। इससे पहले एक युद्ध फतेहपुरसीकरी में हुआ था। आगरा के हीरा सिंह इसमें शहीद हुए थे।

ये भी पढ़ें

image