
70th Republic Day
आगरा। आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 में भारत में अपना संविधान लागू हुआ। वो सुबह कुछ खास थी। आगरा में अलग उत्साह था। हर व्यक्ति के चेहरे पर अलग ही खुशी थी। जहां से भी गुजरो ढोल नगाड़ों की आवाज ह्रदय को आनंदित कर रही थी। सभी के चेहरे पर अपने संविधान के प्रति सम्मान और जोश देखते ही बन रहा था। ये कहना है आजादी की लड़ाई में प्रमुख हिस्सा रहे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय शंकर चतुर्वेदी का। उन्होंने बताया कि खुशी होती भी क्यों ना। जिस लड़ाई के लिए न जाने कितने भारत मां के वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुत दे दी। उसी भारत देश को अपना सम्मान मिल चुका था।
ये था नजारा
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विजय शंकर चतुर्वेदी ने बताया कि उस समय वे औरेया से आगरा आ रहे थे। जब संविधान को लेकर खबर मिली, तो मन खुशी से झूम उठा। आगरा में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में अलग ही माहौल दिखाई दे रहा था। जिस गली-मुहल्लों से गुजरे ढोल-नगाड़े पर लोग झूमते दिखाई दिए। मुख्य मार्गो पर तिरंगा लहराते हुए भारत माता के जयघोष गूंज रहे थे।
आज भी ताजा हो उठती हैं वो यादें
विजय शंकर चतुर्वेदी ने बताया कि 26 जनवरी 1950 की वो खूबसूरत सुबह आज भी जेहन में ताजा है। ताजमहल का शहर आगरा तीन रंग में नहाया हुआ था। ढोल नगाड़ों के साथ जुलूस निकाले जा रहे थे। नगर पालिका भवन के पास बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए, जहां जयकारे गूंजे तो माहौल देशभक्ति के रंग में रंग गया। यहां सभी ने काफी देर तक जयकारे लगाए। इसके बाद हुई बैठक में भारतीय संविधान के बारे में जानकारी दी गई।
Updated on:
25 Jan 2019 05:11 pm
Published on:
25 Jan 2019 01:53 pm
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