
ताजमहल।
आगरा स्थित ताजमहल में गुरुवार को ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकारी करीब 30 फीट नीचे तहखाने में उतरे और मुगल बादशाह शाहजहां व बेगम मुमताज महल की असली कब्र पर रस्में अदा की गईं। इसके साथ ही शाहजहां के 371वें उर्स की औपचारिक शुरुआत हो गई।
उर्स के पहले दिन ASI और उर्स कमेटी की ओर से कब्रों पर फूलों की चादर चढ़ाई गई और गुसल की रस्म (चंदन का लेप) अदा की गई। यह उर्स तीन दिनों तक चलेगा, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान, कव्वाली और देश की खुशहाली के लिए दुआएं की जाएंगी।
उर्स के दौरान ताजमहल में पर्यटकों और जायरीनों के लिए प्रवेश निशुल्क रहेगा। 15 और 16 जनवरी: दोपहर 2 बजे से सूर्यास्त तक। 17 जनवरी: सूर्योदय से सूर्यास्त तक।
शुक्रवार को साप्ताहिक बंदी के कारण सुबह केवल नमाजियों को प्रवेश मिलेगा, जबकि नमाज के बाद दोपहर 2 बजे से पर्यटकों को एंट्री दी जाएगी। मुख्य मकबरे में भी उर्स के दौरान मुफ्त प्रवेश रहेगा।
उर्स के अंतिम दिन 17 जनवरी को भव्य चादरपोशी की रस्म होगी। इस अवसर पर करीब 1720 मीटर लंबी सतरंगी चादर चढ़ाई जाएगी। यह चादर दक्षिणी गेट स्थित हनुमान मंदिर से धर्मगुरुओं की मौजूदगी में निकाली जाएगी और मुख्य मकबरे के तहखाने में स्थित कब्रों पर पेश की जाएगी।
उर्स को लेकर अखिल भारत हिंदू महासभा ने विरोध दर्ज कराया। महासभा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता ASI कार्यालय पहुंचे, पुतला दहन किया और नारेबाजी की।
उर्स कमेटी के अध्यक्ष 82 वर्षीय हाजी ताहिरउद्दीन ताहिर ने बताया कि इस वर्ष चादर पिछले साल से 82 मीटर लंबी है। वे बीते 40 वर्षों से लगातार इस चादरपोशी की परंपरा से जुड़े हुए हैं।
शाहजहां का उर्स इस्लामिक हिजरी कैलेंडर के रजब महीने की 26, 27 और 28 तारीख को मनाया जाता है। इस वर्ष ये तिथियां 15 से 17 जनवरी तक पड़ रही हैं। उर्स के दौरान कुलशरीफ, कुरानख्वानी, फातिहा और चादरपोशी जैसी रस्में पूरे विधि-विधान से अदा की जाएंगी।
Published on:
15 Jan 2026 08:58 pm
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