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पनवारी कांडः 26 साल बाद भी 168 लोग काट रहे कोर्ट के चक्कर

21 जून, 1990 को पनवारी कांड हुआ था। दलित लड़की की बारात चढ़ाने से रोकने पर विवाद हो गया। जाट और जाटवों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। इस घटना को 26 साल हो गए हैं। इसके बाद भी 168 लोग कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं।

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Bhanu Pratap Singh

Jun 21, 2016

In a separate court will now hear cases of power t

In a separate court will now hear cases of power theft

आगरा। 21 जून, 1990 को पनवारी कांड हुआ था। दलित लड़की मुंद्रा की बारात चढ़ाने से रोकने पर विवाद हो गया। जाट और जाटवों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। कई लोग भट्ठे में झोंक दिए गए। कुछ का आज तक पता नहीं है। इस घटना को 26 साल हो गए हैं। इसके बाद भी 168 लोग कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं। न्याय की प्रतीक्षा की जा रही है।

क्या थी घटना
सिकंदरा थाने के गांव पनवारी में जाटव समाज की बेटी की बारात आई। आरोप है कि जाटों ने अपने घर के सामने बारात नहीं निकलने दी। इसी को लेकर हुई तनातनी ने दंगे का रूप ले लिया। पूरे आगरा में प्रतिक्रिया हुई। जाटव समाज के घर जला दिए गए। आगरा में कर्फ्यू लगा दिया गया। इस घटना की राजनीतिक प्रतिक्रिया हुई। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी तक आगरा आए। पीड़ित अभी तक न्याय के इन्तजार में हैं।

आखिर कब मिलेगा न्याय
जाटव समाज उत्थान समिति के संरक्षक और पूर्व न्यायाधीश चतुर्भुज सागर का कहना है कि 26 साल बाद भी न्यान न मिलना अन्याय का ही प्रतीक है। समिति के संयोजक देवकी नंदन सोन ने बताया कि 21 जून, 1990 को आगरा क जातिवाद की आग में झोंक दिया गया था। कुछ दबंग लोगों ने बैंजबाजों के साथ दुल्हे को घोड़ी पर चढ़ने से रोका था। न जाने कब न्याय मिलेगा

नाबालिगों को जेल भेजा
श्री सोन ने बताया कि पुलिस ने उस दौरान मनमानी की। कारखानों और ट्यूशन पढ़कर लौट रहे नाबालिगों को भी जेल भेज गया था। सिकंदरा के 15 वर्षीय ईश्वर चंद्र अग्रवाल और इकराम अली जैसे बेकसूर 168 लोगों को फतेहगढ़ जेल भेज दिया गया। इन लोगों पर अभी तक कोई चार्ज नहीं लगाया गया। एक दर्जन लोग मर चुके हैं। कुछ लोग बूढ़े और असहाय हो गए हैं।

मुख्यमंत्री से फरियाद भी बेकार गई
समिति के संयोजक बंगाली बाबू सोनी ने बताया कि सपा के नेता रामजीलाल सुमन के माध्यम से एक ज्ञापन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को दिया गया था। मांग की गई थी कि बेकसूर लोगों से केस वापस लिए जाएं। यह फरियाद भी नहीं सुनी गई।

मुकदमे वापस लें
समिति के महामंत्री रूप सिंह सोनी ने कहा कि पनवारी कांड के समय यूपी के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव थे। अब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव हैं। उनकी सरकार ने तमाम लोगों से मुकदमे वापस लिए हैं। निर्दोष लोगों से मुकदमे वापस क्यों नहीं लिए जा रहे हैं। आखिर कब तक कोर्ट में तारीख पर जाते रहेंगे।