
Aashfaq saifi
आगरा। भारतीय जनता पार्टी अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व राष्ट्रीय मंत्री असफाक सैफी ने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वजूद पर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को किसने अधिकार दिया कि सरकार द्वारा तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को न्याय देने के लिए प्रस्तावित बिल को नामंजूर करे। आखिर पर्सनल लॉ बोर्ड पूरे देश के मुसलमानों द्वारा चुनी गई संस्था है क्या? नहीं, यह महज चंद मौलानाओं द्वारा बनाया गया एनजीओ है, जिसने आज तक मुस्लिमों को गुमराह किया है। तथा हिंदू मुस्लिमों के बीच दूरियां पैदा कर अपनी रोटी सेकता रहा है।
क्यों हो रहा विरोध
असफाक सैफी ने कहा कि आखिर मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे कानून का यह क्यों विरोध कर रहे हैं। आज सबसे अधिक मुस्लिम महिलाओं का उत्पीड़न बोर्ड में बैठे चंद मौलानाओं की वजह से हो रहा है। महिलाएं पुरुषों के हाथ की कठपुतलियां बन चुकी हैं तथा उत्पीड़न का शिकार हो रही हैं। यदि मोदी सरकार द्वारा तीन तलाक पर कानून बनाने की कोशिश की जा रही है,य तो पर्सनल लॉ बोर्ड के पेट में दर्द क्यों हो रहा है, दर्द होना लाजिमी है क्योंकि कानून बनने के बाद उक्त बोर्ड के मौलानाओं की रोटियां बंद हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जल्द से जल्द तीन तलाक पर कानून बनाने की मांग की है, जिससे तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को बचाया जा सके तथा वह अपने हक की लड़ाई लड़ सकें।
जीवन में आएगी खुशहाली
उन्होंने कहा कि जिस तरह से सरकार द्वारा तीन तलाक पर पर कानून बनाया जा रहा है उससे महिलाओं के जीवन में खुशहाली आएगी। खुली हवा में आजादी की सांस ले सकेंगी। जिस तरह से 22 मुस्लिम देशों में तलाक पर प्रतिबंध है, उसी तरह से भारत में भी प्रतिबंध जरूरी है, जिससे मुस्लिम महिलाओं को उत्पीड़न से बचाया जा सके। कानून बनने से भारत में मुस्लिम महिलाओं के तलाक में कमी आएगी तथा उत्पीड़ित महिलाओं को भी उनका हक मिल सकेगा।
Published on:
27 Dec 2017 04:16 pm
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