9 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

catch_icon

प्लस

epaper_icon

ई-पेपर

profile_icon

प्रोफाइल

Crime File: गुल्लो…फूला डकैत की एक आवाज पर माशूका ने पुलिस अफसर को कर दिया था छलनी

उत्तर प्रदेश में अपहरण की सबसे बड़ी वारदातों में से एक, आगरा में हुई थी। इसे फूला गैंग ने अंजाम दिया था। पढ़िए इस वारदात की कहानी।

4 min read
Google source verification

आगरा

image

Vijay Kumar Jha

Jan 08, 2026

Janga Phoola gang Agra story, IPS Ajay Raj Sharma,school bus kidnapping dacoits India, Phoola gang kidnapping children,Chambal bandits historical crime,Ajay Raj Sharma memoir Biting the Bullet

प्रतीकात्मक तस्वीर। PC: AI

बात उन दिनों की है जब अजय राज शर्मा ने उत्तर प्रदेश के आगरा में बतौर सहायक पुलिस अधीक्षक (एएसपी) जॉइन किया था। तब एसके शुंगलू वहां एसएसपी हुआ करते थे। एक सुबह शर्मा एसएसपी दफ्तर में उनके साथ बैठे थे। अचानक एक वायरलेस संदेश आया। संदेश देखते ही दोनों अफसरों के होश उड़ गए। खेरागढ़ के एक स्कूल से एक क्लास के सभी बच्चों को उनके टीचर सहित अगवा कर लिया गया था।

अपहरण और हत्या की ऐसी वारदात सुन अफसर भी अचंभित

दोनों अफसर यह जान कर हिल गए। आगे की सूचना तो और हिला देने वाली थी। 40 हथियारबंद डकैतों ने बंदूक की नोंक पर एक बस को अगवा कर लिया था और खेरागढ़ के एसएचओ को मार डाला था। ये सभी डकैत फूला गैंग के थे। इनमें उसकी माशूका गुल्लो भी शामिल थी। खुद फूला भी साथ था। एसएचओ को गुल्लो से मरवाने के बाद वह और उसके साथी अगवा बच्चों और टीचर को उसी बस में लेकर भाग गए थे।

एएसपी शर्मा और एसएसपी शुंगलू ने जीवन में ऐसी वारदात कभी न सुनी और न देखी थी। दोनों घटनास्थल की ओर भागे। इसी बीच एसएसपी ने एएसपी शर्मा को जांगा-फूला गैंग के बारे में बताया। यह गैंग आगरा में दस साल से खौफ का दूसरा नाम बना हुआ था। पूरे चंबल में इसका आतंक था।

जांगा गैंग में शामिल होकर बाद में सरदार बन गया था फूला

फूला राजस्थान के भरतपुर जिले के राजखेड़ा इलाके के बजना गांव का था। यह आगरा जिले से सटा। फूला पहले जांगा के गैंग में था। जांगा की डकैती का वसूल था- रियासत में रहो, अंग्रेजों को लूटो। वह देसी राजाओं की रियासत (भरतपुर, धौलपुर) में पनाह लेता था और अंग्रेज शासित इलाकों में आतंक मचाता था। इस लिहाज से आगरा में उसने अपना खौफ फैला रखा था। जांगा के मरने के बाद फूला गैंग का सरदार बन गया था।

गैंग की कमान जब फूला के हाथों में आई तो उसने अपराध का साम्राज्य काफी फैला लिया था। उसने हथियारों का भारी जखीरा जमा कर लिया था और अपने गुर्गों को सेमी ऑटोमैटिक राइफल, स्टेन गन जैसे आधुनिक हथियारों से लैस कर रखा था।

‘टार्गेट’ पहचान नहीं पाया तो टीचर समेत पूरी क्लास को ही कर लिया अगवा

जांगा-फूला के परिचय की दास्तान खत्म होते-होते दोनों अफसर घटनास्थल पर पहुंच गए थे। वहां पहले से भीड़ जमा थी। एसआई महावीर सिंह की लाश निढाल पड़ी थी। शरीर गोलियों से छलनी था। खून की धार जम गई थी। उनके दाहिने हाथ में एक पर्चा दबा था, जिस पर लिखा था 'कुंवरजी गदरिया'।

पता चला कि फूला को असल में अमीर बाप के दो बेटों को अगवा करना था, लेकिन पहचान नहीं होने के कारण उसने क्लास के सभी बच्चों को उठा लिया। उन्हें उठाते हुए उसने ये ऐलान भी किया था कि पहचान होते ही बाकी बच्चों को छोड़ देगा।

एसआई महावीर सिंह की दिलेरी

बच्चों को ले जाने के लिए वह हाईवे पर बस अगवा करने गया। जो बस सबसे पहले आई उसे रोक लिया और सवारियों को उतर जाने के लिए कहा। लेकिन, सवारियों में खेरागढ़ के स्टेशन ऑफिसर एसआई महावीर सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने दिलेरी दिखाई और सवारियों को बैठे रहने के लिए कहा। महावीर की दिलेरी देख कर फूला हैरान था। वह सोच रहा था- आखिर ये है कौन जो मुझे चुनौती देने की हिम्मत दिखा रहा है! फूला गुस्से में चिल्लाया- पागल हो क्या? मालूम नहीं है कि मैं कौन हूं? बजना का फूला हूं मैं!'

महावीर सिंह डिगे नहीं। कहा- मुझे अच्छी तरह पता है। पर मुझे जानना है कि तुम ये क्यों कर रहे हो?

दोनों के बीच इस बहस को बस के बाकी यात्री दिल थामे देख रहे थे। उन्हें पता नहीं था कि अगले पल क्या होने वाला है? महावीर सिंह फूला के खौफ से बेअसर दिख रहे थे।

फूला ने पूछा- तुम कौन हो? महावीर सिंह ने अपना परिचय दिया और कहा कि मेरे इलाके में मेरे होते हुए यह नहीं होने दूंगा। इसलिए सवारियों को बस से नहीं उतरने के लिए कहा है।

फूला ने कहा- माना तुम बहादुर हो, लेकिन मूर्खता क्यों कर रहे हो? मुझसे पंगा क्यों ले रहे हो? मेरे रास्ते में मत आओ। यात्रियों को बस में मत रोको। महावीर सिंह ने एक न सुनी। उन्होंने यात्रियों से फिर कहा- बस से उतरना मत। फूला बोला- तुम्हें लगता है कि हमें रोक लोगे? कहीं यह तो नहीं लग रहा कि हमें मार डालोगे? महावीर ने कहा- अफसोस कि मैं निहत्था हूं, वरना तुम अब तक मारे जा चुके होते।

फूला गुस्से में था ही, और उबल पड़ा। उसका सब्र अब जवाब दे गया था। उसने आवाज लगाई- गुल्लो! गुल्लो ने महावीर सिंह को छलनी कर दिया। गुल्लो गैंग की एक मात्र महिला और फूला की माशूका थी।

फूला-गुल्लो की लव स्टोरी

गुल्लो के गैंग में आने और फूला की माशूका बनने की कहानी भी दिलचस्प है। वह कमसिन और खूबसूरत लड़की थी। उसकी शादी उससे दोगुने उम्र के निठल्ले शख्स से हो गई थी। उसका पति गांव में यहां-वहां बैठा रहता और हुक्का पीते रहता था। वह पति से एकदम नाखुश रहती। फूला उसके गांव आता-जाता रहता था। इसी बीच दोनों में प्यार हो गया।

गुल्लो को अपनी बेमेल शादी के बंधन से छुटकारा चाहिए था। एक दिन उसका पति कुंए पर बैठ कर हुक्का पी रहा था। गुल्लो पीछे से गई और उसे धक्का दे दिया। कुंए से कोई उसके पति की लाश निकालता, इससे पहले ही वह फूला के साथ भाग गई।
अब गुल्लो फूला के गैंग में थी। उसने उसे हथियार चलाना सिखाया और गैंगस्टर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वह गैंग की इकलौती सदस्य थी, जिसका दामन बेदाग था। फूला नहीं चाहता था कि गैंग में कोई ऐसा सदस्य हो जिसने कोई जुर्म ही नहीं किया हो। यही कारण था कि महावीर सिंह को उसने उसी से मरवाया।

बता दें कि यह कहानी 1966 बैच के यूपी काडर के आईपीएस रहे अजय राज शर्मा ने अपनी किताब ‘बाइटिंग द बुलेट’ में दर्ज की है।