
आगरा. ताजनगरी से करीब 75 किलोमीटर दूर स्थित तीर्थ बटेश्वर में हर वर्ष विशाल मेला लगता है। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर में सैकड़ों वर्षों से इस मेले का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला तीर्थ बटेश्वर में तीन चरणों में लगाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यमुना नदी में स्नान कर के शिवलिंग पर जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है। इस दौरान भारत के कई राज्यों से श्रद्धालु यहां आकर यमुना नदी में स्नान कर भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग पर जलाभिषेक कर अपनी मन्नत मांगते हैं। मुगलिया काल के दौरान बादशाह अकबर इसी मेले से ऊंट-घोड़े आदि जानवरों की खरीदारी करते थे। 25 दिनों तक चलने वाला बटेश्वर मेला 02 नवम्बर से शुरू हो गया है।
1646 में तत्कालीन भदावर नरेश बदन सिंह ने बटेश्वर में एक कोस लंबा अर्द्धचंद्राकार बांध बनवाकर यमुना का बहाव मोड़ा था, तभी उन्होंने मेला बटेश्वरनाथ का आगाज किया था। बांध पर 101 शिव मंदिरों की श्रृंखला बनी है। जिला पंचायत द्वारा आयोजित बटेश्वर मेले के पहले चरण में बैल, गाय, दूसरे चरण में घोड़े, ऊंट, गधे, खच्चर का मेला लगता है। तीसरे चरण में लोक मेले का आयोजन होता है। इसमें एकादशी, पूर्णिमा दौज को नागा शाही स्नान करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों लोग यमुना में डुबकी लगाकर भोले के दर पर मत्था टेकने पहुंचते हैं। दौज की श्रृंगार पूजा भदावर राज घराने के प्रतिनिधि करते हैं।
5 लाख का घोड़ा और एक लाख का ऊंट
बटेश्वर पशु मेले में राजस्थान, मध्य प्रदेश व अन्य जिलों से व्यापारी अपने पशु लेकर आए हैं। इस बार महंगे घोड़े और ऊंट लोगों के आकर्षण केंद्र बने हुए हैं। मथुरा के गुन्नू व्यापारी के घोड़े राजू की बोली सात लाख रुपए तक लगाई गई। वहीं, डांस करने वाला जैसलमेरी ऊंट वीरू सभी को भाया। लोगों ने उसकी कीमत एक लाख रुपये तक लगा दी। इटावा के साधु भी मेले में सात लाख की कीमत की अपनी दो घोड़ी रामा और राधा को लेकर पहुंचे।
Published on:
10 Nov 2021 05:49 pm
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