
प्रियांशा ने upsc में 31 वीं रैंक हासिल की है
कहते हैं की लहरों से डर कर कभी नौका पार नहीं होती और कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती! इस शेर को सच करके दिखाया है यूपीएससी में 31 वीं रैंक लाने वाली आगरा की प्रियंशा गर्ग ने, इस मुकाम को पाने के लिए उन्होंने पहले भी तीन बार कोशिश की और सफल न होने पर उनको निराशा भी हुई, पर उन्होंने अपनी कमियों को ढूंढ कर चौथी बार प्रयास किया और अब वो सफलता को प्राप्त कर आईएएस बनकर देश की सेवा करने जा रही हैं। पत्रिका के संवाददाता ने प्रियांशा के साथ विशेष बातचीत कर उनके विचारों को जाना।
पिता को देती हैं श्रेय
यूपीएससी में 31 वीं रैंक लाने वाली आगरा के कमलानगर निवासी प्रियांशा गर्ग अपनी सफलता का सारा श्रेय अपने पिता को देती हैं। उनका कहना है की पिता ने उन्हें पढ़ने के लिए लगातार मोटिवेट किया और आज उनकी वजह से वो इस मुकाम को हासिल कर पाई हैं। प्रियांशा ने बताया की पढ़ाई के कारण ही वो यह सफलता हासिल कर पाई हैं और वो चाहती हैं की सभी के जीवन में शिक्षा का उजाला फैले, इसलिए वो शिक्षा के क्षेत्र में काम करने को अपनी प्राथमिकता मानती हैं।
पड़ोसी के आईएएस बनने से हुई थी इंस्पायर
प्रियांशा ने बताया की उनके पिता का सपना था कि परिवार ने एक बच्चा आईएएस बने, जब वो सातवीं कक्षा में थी तो पड़ोस में रहने वाले भैया के यूपीएससी क्लियर करने पर वो इंस्पायर हो गई थीं और उन्होंने यूपीएससी पास करने का सपना दिल में बसा लिया था, इस काम में पिता ने भी पूरा सहयोग किया।
तीन बार असफल होने पर हुई निराश
प्रियांशा बताती हैं की पहली बार उन्होंने मेंस पास किया और इंटरव्यू में रह गईं, इसके बाद दो बार सिर्फ प्री पास कर पाईं थी। मन में निराशा आ गई थी पर परिवार और दोस्तों ने मोटिवेट किया और उन्होंने अपनी गलतियां खुद ढूंढना शुरू कर उन्हें दूर किया। रोजाना छः से सात घंटे पढ़ाई करती थी और नियमित रूप से समाचार पत्र और न्यूज वेबसाइट पढ़ना उनकी हॉबी थी। इंटरव्यू में पूछा गया सवाल इज इंडिया बीकम ए ग्लोबल साउत हमेशा या रहेगा। इसके अलावा चेन के बारे पूछे गए सवाल भी याद रहेंगे।
परिवार में खुशी की लहर
वहीं प्रियांशा के पिता विनोद अग्रवाल ने कहा की पूरे शहर को और उन्हे अपनी बेटी पर गर्व है और उन्हें इतनी खुशी है की वो शब्दों में जाहिर नहीं कर पाएंगे। प्रियांशा की माता ममता अग्रवाल ने कहा की उन्होंने कभी बच्चों में अंतर नहीं समझा और पढ़ाई को सबसे जरूरी मानते हुए बच्चों को पढ़ाई के लिए मोटिवेट किया, आज उनकी मेहनत का फल बेटी की सफलता के रूप में मिला है।
Published on:
25 May 2023 02:15 pm
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