29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

AGRA NEWS: तीर्थ राज बटेश्वर पर गंगा दशहरा पर हजारों ने लगाई डुबकी, जानिए इतिहास

गंगा दशहरा के अवसर पर आगरा के बाह क्षेत्र में बटेश्वर धाम पर लाखों श्रद्धालु डुबकी लगाने पहुंचे।

2 min read
Google source verification

आगरा

image

Avinash Jaiswal

May 30, 2023

bateshwar_dham.jpg

गंगा दशहरा पर्व पर बटेश्वर घाट पर डुबकी लगाते श्रद्धालु

आगरा के तीर्थराज बटेश्वर मंदिर श्रृंखला के यमुना और और चंबल नदी के घाटों पर गंगास्नान के अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। हालांकि शहरी क्षेत्रों के घाटों में रेणुका धाम को छोड़कर सभी घाटों पर यमुना में पानी न होने और गंदगी के कारण कम ही लोग दिखाई दिए।

तीर्थराज बटेश्वर पर देर रात से यूपी और एमपी के हजारों श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। यमुना और चंबल के घाटों पर डुबकी लगाने के बाद 101 शिव मंदिरों की श्रृंखला पर जलाभिषेक के बाद श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की। घाटों पर जगह - जगह लोगों ने अपने कुलदेवताओं का पूजन करने के बाद पुण्य दान किया और भंडारों का आयोजन किया।

476 साल पुराना है इतिहास

आगरा की बाह तहसील में बटेश्वर गांव के मंदिर तीर्थराज बटेश्वर पर पूरे वर्ष अलग अलग मौकों पर हजारों श्रद्धालु आते हैं। यहां पहले शिवलिंग की स्थापना 1646 में भदावर घराने के राजा बदन सिंह ने की थी। मान्यता है कि उनके एक बेटी थी और उन्हें अपने राज्य के उत्तराधिकारी के रूप में पुत्र की आवश्यकता थी। यमुना किनारे उन्होंने शिवलिंग की स्थापना की थी और पूजा शुरू की थी। शिव के आशीर्वाद से उनकी पुत्री लड़की से लड़का बन गयी थी। इसके बाद 1655 से 1773 तक भदावर घराने के राजाओं ने 40 शिवलिंग स्थपित किये। वर्तमान में यहां 101 शिवलिंग स्थापित हैं। मान्यता है कि कार्तिक मास में भगवान शिवखुद धरती पर गंगास्नान के लिए आते हैं। राजा भदावर घराने द्वारा यमुना के जल से शिवलिंग का अभिषेक करने के बाद से यहां सभी ग्रामीण अभिषेक करने आने लगे। लोग यमुना में स्नान कर पावन जल लेकर भगवान का जलाभिषेक करते हैं।

डकैतों ने शुरू की थी घंटा चढ़ाने की परंपरा

स्थानीय निवासी मोनू पाराशर का कहना है कि यहां मनोकामना पूरी होने पर पीतल का घंटा चढ़ाने की परंपरा है। पहले जमींदार या राजा के अत्याचार के खिलाफ लोग बागी होकर बीहड़ में कूद जाते थे। डकैतों में बीहड़ में जाने से पहले यहां घंटा चढ़ाने की परंपरा थी। डकैत कोई भी बड़ा काम करने से पहले बटेश्वर धाम आकर आशीर्वाद लेते थे। कुख्यात डाकू मानसिंह ने भी यहां घंटा चढ़ाया था। आज भी यहां कई घण्टों पर बागियों के नाम लिखे मिल जाएंगे। डाकू घुनघुन परिहार ने यहां घंटा चढाकर बागी बनने का ऐलान किया था। डाकू पान सिंह तोमर जब भी कोई बड़ा काम करता था तो यहां घंटा चढाता था। मंदिर में रहने वाले साधु सीताराम दास ने बताया कि 1978 की बाढ़ में मंदिर परिसर का पीपल का पेड़ बह गया था।इस बाढ़ में यहां के सैकड़ों घंटे बह गए। आज भी यहां हजारों घंटे मौजूद हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री की जन्मस्थली है बटेश्वर

बटेश्वर गांव पूर्व प्रधानमंत्री स्व अटल बिहारी बाजपेई की जन्मस्थली भी है। स्व अटल जी का जन्म यहीं हुआ था। सरकार द्वारा यहां उनकी यादों के अवशेष समेट कर म्यूजियम बनाया जा रहा है। अटल जी की अस्थियों को यहीं विसर्जित किया गया है। बटेश्वर को टूरिज्म सर्किट में भी शामिल किया जा रहा है।

Story Loader