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Agra university का राम ही मालिक, जानिए अब क्या हुआ

बीएड घोटाले का मास्टर माइंड विश्वविद्यालय ने किया निलंबित, चार साल से फरार था हरीश कसाना

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आगरा

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Abhishek Saxena

Dec 27, 2017

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आगरा। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (आगरा विश्वविद्यालय) का राम ही मालिक है। डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय शिक्षणेतर कर्मचारी संघ का पूर्व अध्यक्ष हरीश कसाना पिछले चार साल से गायब था, लेकिन पता अब आकर चला है। उसे निलंबित कर दिया गया है।

बीएड घोटाला
बता दें कि आगरा ? विश्वविद्यलाय में बीएड घोटाला हुआ है। सत्र 2004-2005 में बीएड की 4570 हजारों फर्जी मार्कशीट बनाई गई। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने इस महाघोटाले को उजागर किया है। इसमें चार्ट रूम के प्रभारी रहे हरीश कसाना को आरोपी बनाया गया है। एसआईटी ने हरीश कसाना के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किए हैं। वह फरार चल रहा है।एसआईटी ने कसाना को पूछताछ के लिए कई बार लखनऊ बुलाया। वह एक बार पहुंचा और गायब हो गया।

2013 से गायब था
हरीश कसाना की वर्तमान में तैनाती डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के खंदारी परिसरस्थिति बेसिक साइंस संस्थान के भौतिकी विभाग में है। एसआईटी ने हरीश को महाघोटाला में दोषी ठहराया तो विश्वविद्यालय ने उसकी ओर ध्यान देना बंद कर दिया। वह 2013 से फरार चल रहा है। गैर जमानती वारंट जारी होने पर चपरासी को खंदारी परिसर भेजा गया। वहां पता चला कि हरीश कसाना तो कई साल से नहीं आ रहा है। अनुपस्थिति का कोई करण भी नहीं बताया गया।
कुलपति के निर्देश पर निलंबन
यह मामला डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अरविन्द दीक्षित के संज्ञान में लाया गया। उनके निर्देश पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव आरपी सिंह ने निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। यह आदेश हरीश कसाना को हस्तगत नहीं कराया जा सका है, क्योंकि उसका कोई अता-पता नहीं है। यह भी कम अचरज की बात नहीं है कि कोई कर्चमारी चार साल से बिना कारण बताए गायब है और विश्वविद्यालय को कोई खबर ही नहीं है।

ये भेजे जा चुके हैं जेल
बीएड घोटाले में स्वामी शरण (डिग्री विभाग के प्रभारी), सतेंद्र पाल सिंह (चार्ट रूम), लक्ष्मण सिंह यादव (प्रभारी बीए प्रथम वर्ष) और साकेत प्रसाद (डिस्पैचर) को जेल भेजा जा चुका है। चारों कर्मचारियों को 28 अक्टूबर, 2017 को निलंबित कर दिय गया था। बता दें कि फर्जी मार्कशीट के आधार पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश , आंध्र प्रदेश में हजारों लोगों ने शिक्षक की नौकरी पा ली। पूरे प्रदेश में ये लोग चिह्नित कर लिए गए हैं। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हो रही है। अब तक लिया गया वेतन भी वसूल किया जाएगा।

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