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कार्य कितना भी बढ़ जाए परंतु अपनी मूल बात को नहीं छोड़ेंगे: सुनील आम्बेकर

65वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन परिषद कार्यपद्धति, स्वरूप और प्रासंगिकता के सत्र को किया गया संबोधित

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आगरा

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Dhirendra yadav

Nov 24, 2019

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आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन परिषद कार्यपद्धति, स्वरूप और प्रासंगिकता के सत्र को संबोधित करते हुए विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय संगठन मंत्री सुनील आंबेकर ने कहा कि आज राष्ट्र के लिए स्मरणीय दिवस, "लचित बोरफुकान"असम के क्रान्तिकारी सबके लिए प्रेरक है, इसका महत्व समस्त विश्व समझेगा।

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पूरी टीम करती है कार्य
उन्होंने कहा कि हमारा प्रत्येक कार्य उस दिशा में बढ़ता कदम है। अपनी इतने दिनों की यात्रा में हमने स्थापित किया कि देश के युवाओं का जागृत और संगठित किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन, सेवा और अन्य कई रचनात्मक कार्य परिषद हाथ में लेता है। परिषद की कार्य पद्धति में मात्र एक व्यक्ति को श्रेय नहीं अपितु एक टीम कार्य करती है। डॉक्टर हेडगेवार की विचारों के अनुरूप ही कार्य पद्धति विकसित की गई, जिसमें एक कार्यकर्ता या व्यक्तित्व निर्माण का विश्वास जागृत होता है। कार्य पद्धति का विकास प्रत्यक्ष आचरण से हुआ, यह मात्र थ्योरी नहीं। मनुष्य के मूल गुण धर्म बदले नहीं, अतः पता हमारी कार्यपद्धती का स्थाई मूल भी प्रासंगिक बना रहता है। स्वागतशीलता को बनाए रखना है, अतः इकाइयों को वास्तविक अर्थ प्रदान करने की आवश्यकता है। कोई भी कार्यकर्ता सेकेंडरी नहीं सभी महत्वपूर्ण परंतु कोई भी अपरिहार्य नहीं।

कार्य पद्धति का भाव महत्वपूर्ण
बैठकों में कार्य पद्धति का भाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्य पद्धति के विकास के कारण शिक्षा क्षेत्र के लोगों में विकास हो रहा है। आज के समय में देश के हर हिस्से में परिषद का कार्य बढ़ रहा है। बैठकों में औपचारिकता की आवश्यकता कार्यपद्धति का भाव अत्यंत महत्वपूर्ण है। साथ ही साथ सहभागिता को बढ़ाने की भी आवश्यकता है। हमारी रचनात्मक कार्य और कार्य पद्धति में निरंतरता आवश्यक है।

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ऐसे कार्यकर्ताओं की आवश्यकता
कार्य विभाजन, नवाचार को देखते हुए एबीवीपी ने सिद्ध किया है कि संख्या के साथ-साथ हमारे कार्यों की गुणवत्ता भी बढ़ी है। कार्य पद्धति को सही स्वरूप में और तत्परता से पालन करने की आवश्यकता सदैव बनी रहेगी। बदलती तकनीक में रूढ़ होने के स्थान पर उसे स्वीकार कर उपयोग में लाने की आवश्यकता है। कार्यकर्ता के गुणों की चर्चा सर्वत्र तथा दोषो की चर्चा यथास्थान पर की जानी चाहिए। पूर्व योजना, पूर्ण योजना, सभी गुणों वाले कार्यकर्ताओं का उचित समायोजन अति आवश्यक है। कार्यपद्धती के आधार से कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है। आज बदलते युग में नवाचार के साथ अपने मूल को नहीं छोड़ेगा अभाविप।सत्र के प्रारम्भ में युवाओं के बीच लोकप्रिय मासिक पत्रिका "छात्रशक्ति"का विमोचन ।विमोचन अभाविप के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री सुनील आम्बेकर जी,राष्ट्रीय अध्यक्ष एस.सुब्बैया,राष्ट्रीय महामंत्री निधि त्रिपाठी ,छात्रशक्ति के संपादक आशुतोष भटनागर ,छात्र शक्ति प्रमुख अजित सिंह जी ने किया।