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सीएम योगी आदित्यनाथ पर ज्योतिषाचार्य की बड़ी भविष्यवाणी, आने वाले समय में बन सकते हैं…

योगी आदित्यनाथ की कुंडली में शासन का कारक ग्रह सूर्य बुध के साथ युति बनाकर बुध आदित्य महायोग बनाकर कर्म भाव में विराजमान है, जिसने लगातार पांच बार सांसद और कम उम्र में मुख्यमंत्री बनाया। आने वाले समय में देश के प्रधानमंत्री तक भी पहुंचा सकता है

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आगरा

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Abhishek Saxena

Dec 07, 2018

yogi adityanath

BJP meeting for election 2019,CM Yogi gives Rs 2.51 lakh in party fund

आगरा। वैदिक सूत्रम चेयरमैन भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जन्मकुंडली में स्थित ग्रहों का ज्योतिषीय विश्लेषण करते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ जिन्होंने 19 मार्च 2017 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी, जो कि वैदिक हिन्दू ज्योतिष महूर्त प्रणाली के अनुसार नवीन शपथ ग्रहण करने के लिए शुभ फल प्रदान करने वाला महूर्त नहीं था। उस समय मीन खर या मल मास आरम्भ हो गया था। यही कारण रहा कि वर्ष 2017 के उत्तर प्रदेश में संम्पन हुए उपचुनावों में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने ही गढ़ गोरखपुर क्षेत्र में ही भारतीय जनता पार्टी के उमीदवारों को हार का सामना करना पड़ा। मलमास या खर मास में सूर्य ग्रह की स्थिति शुभ फल प्रदान करने वाली नहीं होती है।

ये है कुंडली
वैदिक सूत्रम चेयरमैन भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपलब्ध जन्मकुंडली पांच जून 1972, जन्म समय अपरान्ह 12 बजे, पंचूर, पौड़ी गढ़भाल, उत्तराखंड के आधार पर उनकी जन्मकुंडली का ज्योतिषीय विश्लेषण करते हुए कहा कि इस विवरण के अनुसार योगी आदित्यनाथ की कुंडली सिंह लग्न की है। इनकी चंद्र राशि कुंभ है। लग्न स्वामी सूर्य तो राशि स्वामी शनि हैं। इनका जन्म पूर्व भाद्रपद नक्षत्र के दूसरे चरण में हुआ है। वर्तमान में इन पर केतु की महादशा में सूर्य की अंतरदशा अवधि चल रही है 24 जनवरी 2019 तक जो कि यश प्रसिद्वि में कभी कभी ग्रहण लगाने की कोशिस करता है छाया ग्रह केतु और 24 जनवरी 2019 के बाद केतु की महादशा में चन्द्रमा ग्रह की अंतरदशा अवधि आरम्भ होगी जो कि 24 अगस्त 2019 तक रहेगी इसलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए 24 अगस्त 2019 तक का समय विशेष चुनौतीपूर्ण है। छाया ग्रह राहु-केतु के सूर्य और चन्द्रमा दोनों ग्रह महाशत्रु होते हैं, पौराणिक समुद्र मंथन के प्राचीन काल से ही इनकी शत्रुता चली आ रही है। इसलिए केतु की महादशा में सूर्य और चन्द्रमा ग्रह की अंतरदशा अवधि शुभ फल प्रदान नही करती हैं किसी की भी जन्मकुंडली में इसलिए राहु-केतु की महादशा में इन अंतरदशा अवधि में प्रत्येक व्यक्ति को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है नही तो उसकी छवि पर धब्बा लग सकता है इस अंतरदशा अवधि में राहु केतु की आपसी शत्रुता के कारण।

शेर समान बनाता है ये योग
पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लग्न सिंह है। जिसका कि स्वामी ग्रहों का राजा सूर्य है, जो कि इनके स्वभाव को सिंह अर्थात शेर के समान बनाता है। योगी आदित्यनाथ के स्वभाव में उग्रता व वाणी में ओज सूर्य की सिंह राशि के लग्न के कारण ही है। वहीं इनकी चन्द्र लग्न की राशि कुंभ का स्वामी शनि ग्रह इन्हें न्यायप्रिय भी बनाता है। इसी न्यायप्रियता के कारण इन्हें लोकप्रियता हासिल हुई है। जिसकी बदौलत इन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय किया है। कर्म भाव में शक्तिशाली सूर्य और बुध की एक साथ युति अर्थात बुध आदित्य महा राजयोग के कारण क्योंकि दशम भाव अर्थात कर्म भाव में सूर्य ग्रह को कारक और विशेष शक्तिशाली अवस्था में माना जाता है वैदिक हिन्दू फलित ज्योतिष के अनुसार, कुल मिलाकर यह कह सकते हैं कि इनकी जन्मकुंडली के अनुसार कर्मभाव में बुधादित्य योग, राशि स्वामी शनि का सातवां होना ऐसे योग बनाता है कि सत्ता इनके पास ही रहना चाहती है। शनि ग्रह के कारण ही इनकी छवि एक समुदाय विशेष के कट्टर नेता के रूप में बनी है। लेकिन देवगुरु बृहस्पति ग्रह जो कि धार्मिक और सबसे ज्यादा शुभ ग्रह भी है इनकी जन्मकुंडली में देवगुरु बृहस्पति अपनी स्वयं की राशि धनु में स्थित हैं जो कि ऊपर से शुभ जरूर दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तविकता में वह देवगुरु बृहस्पति इनके लिए शुभ फल प्रदान करने वाले नही हैं क्योंकि कोई भी अपनी स्वराशि में स्थित ग्रह अगर जन्म के समय वक्री अवस्था में हो, तो वह अशुभ फल प्रदान करने वाला होता है अर्थात वह ग्रह ऐसी स्थिति में अपनी नीच राशिस्थ अवस्था का फल प्रदान करता है उस व्यक्ति को, इसलिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी वाणी और अपने विश्वसनीय सहयोगियों से विशेष रूप से सावधानी बरतने की जरूरत है। क्योंकि देवगुरु बृहस्पति ग्रह की स्थिति किसी की भी जन्मकुंडली में सकारात्मक अवस्था मन से सहयोगियों से सहयोग प्रदान करती है आन्तरिक रूप में जबकि नकारात्मक अवस्था में ज्यादातर व्यक्ति को अपने सहयोगियों से ही विश्वासघात कराती है।

2019 का चुनाव अग्नि परीक्षा साबित होगा
वैदिक सूत्रम चेयरमैन भविष्यवक्ता पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि योगी आदित्यनाथ की जन्मकुंडली 24 जनवरी 2019 से इन पर केतु की महादशा में चन्द्रमा की अंतरदशा आरम्भ होगी जो कि 24 अगस्त 2019 तक रहेगी, इसलिए लोकसभा 2019 का चुनाव योगी आदित्यनाथ के लिए अग्नि परीक्षा से कम नहीं होगा। केतु और चन्द्रमा ग्रह की आपस में महा शत्रुता है और चन्द्रमा को राजनीति दूसरा सबसे बड़ा आम जनता का कारक ग्रह कहा जाता है। 21 फरवरी 2024 के बाद योगी आदित्यनाथ पर सबसे ज्यादा शुभ औऱ और ऊंचाईयों पर ले जाने वाला शुक्र ग्रह की 20 वर्ष की महादशा अवधि आरम्भ होगी, जो योगी आदित्यनाथ के लिए आने वाले समय में प्रधानमंत्री जैसे देश के सबसे बड़े उच्च पद तक पहुंचाने में मददगार साबित हो सकती है। 21 फरवरी 2024 के बाद उत्तर प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भविष्य के प्रधानमंत्री बनने की तरफ भी उनके ग्रह ले जा सकते हैं। पर इसके लिए योगी आदित्यनाथ को अपनी जन्मकुंडली में स्थित वाणी का कारक देवगुरु बृहस्पति ग्रह के नकारात्मक प्रभाव को अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के माध्यम से काबू करने की आवश्यकता है जिससे देवगुरु बृहस्पति ग्रह का नकारात्मक प्रभाव उनकी स्वच्छ छवि को धूमिल न कर दे। 21 फरवरी 2024 के बाद योगी आदित्यनाथ का उत्तर प्रदेश व देश की राजनीति में इनका कद तो ऊंचा होगा ही साथ ही प्रतिद्वंदी भी इनसे प्रभावित होंगे। इनकी कुंडली में मंगल शत्रु को भी इनका मुरीद होने के लिए प्रेरित करता है।