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बालक ध्रुव किस तरह प्रभु के मन को भाये, पढ़िये ध्रुव के ध्रुव तारा बनने की कथा

आचार्य पवन नंदन के श्रीमुख से प्रवाहित कथा में भक्तिमय उत्सव में डूबे भक्त, कभी बही अश्रुधारा को कभी हुआ भक्तिमय नृत्य

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आगरा

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Dhirendra yadav

Dec 16, 2018

Balak Dhruv

Balak Dhruv

आगरा। जयपुर हाउस स्थित श्रीराम पार्क में आज भक्तिमय उत्सव का नजारा था। ध्रुव चरित्र का सचित्र वर्णन सुन जहां भक्तों की अश्रुधार बहने लगी वहीं तेरी बांकी अदा बांके बिहारी... और गोविन्द के गुण गाइये-गोपाल के गुण गाइये, द्वार मन के खोल कहिए आइये प्रभु आइये... जैसे भजनों पर भक्तों को मन उत्साह के उत्सव में डूब गया। उत्साह से ही उत्सव होता है। जब तक मन में उत्साह न हो तब तक उत्सव नहीं होता। यह कहना था आचार्य पवन नंदन जी का। श्रीमद्भागवत कथा में तीसरे दिन ध्रुव चरित्र, राजा प्रथु का प्रसंग, भगवान ऋषभदेव का चरित्र का भक्तिमय वर्णन किया।

आचार्य पवन नंदन जी ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए बताया कि हर जीवात्मा की दो पत्नियां होती हैं। सुनीति और सुरुचि। जो नीति और नियम पर चले वह सुनीति। यानि नीति और नियम पर चलने से ही (माता सुनीति) ध्रुव जैसे पुत्र की प्राप्ति होती है। ध्रुव का अर्थ है अटल, विश्वास प्रकाश, भक्त, अलौकिक प्रकाश से चमकता सितारा। जिसके दर्शन से आयु की वृद्धि होती है। कार्तिक माह में स्नान करने से जीवन मरण के चक्र से मुक्ति मिलती। तुलसीदास के दोहे भाव कुभाव अनख आलसहु, नाम जपत मंगल दिशी दशहुं... के माध्यम से बताया कि नारायण का नाम किसी भी तरह से (भाव, प्रभाव, आलस, मजाक किसी भी रूप में) लो, वह हमेशा मुक्ति का साधन ही बनता है। भगवान शंकर कल्याण का प्रतीक हैं, जो कल्याण करें वह शंकर है। कथा के अंत में आरती कर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।

सामाजिक संदेश भी दिया

आगरा। आचार्य पवन नंदन जी ने कथा में सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार व सामाजिक संदेश देते हुए कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि पत्नी या किसी भी स्त्री पर जो पुरुष हाथ उठाते हैं, उनके घर में दरिद्रता और कुल का नाश होता है। इसलिए स्त्री का सम्मान करें। कहा कि हमारे यहां प्रकाश को फूंकने की संस्कृति नहीं प्रज्ज्वलित की संस्कृति है। उत्सव (जन्मदिन) के दिन मोमबत्ती फूंकने के बजाय भगवान के समक्ष घा के दीपक जलाएं और बड़ों का आशीर्वाद लें।

इनकी रही विशेष उपस्थिति

प्रवीन अग्रवाल, अध्यक्ष दिनेश बंसल, महामंत्री राकेश कुमार अग्रवाल, कोषाध्यक्ष महावीर मंगल, रूपकिशोर जी, मुन्नालाल बंसल, दिनेश मित्तल, कमल नयन, राकेश जैन, अमरचंद अग्रवाल, महेश गोयल, अशोक गर्ग, अजय गोयल, विनोद गोयल (धागे वाले), गिर्राज प्रसाद (हुंडी वाले), ओमप्रकाश गोयल, अजय कंसल, विजय सर्राफ आदि मौजूद रहे।