
Yamuna barrage
आगरा। यमुना नदी पर डाउन स्ट्रीम का बैराज लोगों की प्यास बुझाने के साथ पर्यटन को भी लाभ देगा, लेकिन समझ कर भी शहर के कुछ बुद्धिजीवी इस बात को नहीं समझ रहे हैं। यमुना नदी में यदि ताजमहल तक पानी रहेगा तो इससे ताज की नींव मजबूत बनी रहने के कारण ताज के अस्तित्व पर खतरा नहीं रहेगा। साथ ही शहर सुंदर दिखने के साथ पेयजल की समस्या से भी लोगों को निजात मिलेगी। इसलिए यमुना पर बैराज उपस्ट्रीम नहीं बल्कि डाउन स्ट्रीम में ही बनना चाहिए।
प्रेसवार्ता का हुआ आयोजन
यह बात रिवर कनेक्ट अभियान के सदस्यों ने होटल गोवर्धन में आयोजित प्रेस वार्ता में कही। वरिष्ठ पत्रकार बृज खंडेलवाल ने कहा कि आगरा तक यमुना में 1-2 फीसदी ही पानी पहुंच पाता है। इसकी वजह दिल्ली से लेकर मथुरा तक लगभग पांच बैराजों का बनना है। आगरा की यमुनना नदी में पांच नदियां (उटंगन, खारी पारो आदि) मिलती हैं। यदि डाउन स्ट्रीम में बैराज बनता है तो इन पाचों नदियों को भी जीवन मिल सकेगा। इसके विपरीत अपस्ट्रीम पर वैराज बनने से न तो शहर को पानी मिलेगा और न ही पर्यटन को कोई लाभ होगा।
ताजमहल पर नहीं रहेगा खतरा
डॉ. देवाशीष भट्टाचार्य ने कहा कि डाउनस्ट्रीम में बैराज बनने से ताज के अस्तित्व पर यमुना में पानी न होने की वजह से जो खतरा मंडरा रहा है वह कम हो सकेगा। श्रवण कुमार ने यमुना के दोनों ओर के घाटों का पुर्ननिर्माण व विकास की मांग रखा। साथ ही राष्ट्रीय पॉलिसी का गठन कर नदियों को राष्ट्रीय सम्पत्ति समझा जाए और नदी पर अतिक्रमण, अवैधानिक खनन डूब क्षेत्र को घोषित किया जाए। कर्नल राजेश चौहान व शैलेन्द्र नरवार ने कहा कि भूमिजल का रिचार्ज हो सके इसके लिए डिसिल्टिंग बहुत जरूरी है। रंजन शर्मा ने कहा कि यमुना नदी को सावरमती के मॉडल की तरह विकसित किया जाए। इस अवसर पर गणेश पांडे, पद्मिनी अय्यर, नंदन श्रोत्रिय, राहुल राज, दीपक राजपूत, शहतोष गौतम, मोहन जाट, सुरेन्द्र शर्मा आदि मौजूद थे।
Published on:
17 Sept 2017 02:48 pm
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