
आगरा। आगरा फतेहपुर सीकरी रोड पर गांव महुअर के समीप निर्माणाधीन लेदर पार्क को लेकर दो हफ्तों में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। इसको लेकर पत्रिका टीम ने शुक्रवार को किसानों से बात की। पत्रिका टीम से बात करते हुए सुनवाई से पहले ही लेदर पार्क के लिए अधिग्रहित की गई जमीन को लेकर किसानों ने बड़ा ऐलान कर दिया है। किसानों ने कहा है कि उन्हें जमीन का चार गुना मुआवजा चाहिए। सरकार ने मुआवजा नहीं दिया तो वे इसका निर्माण नहीं होने देंगे। किसानों ने निर्माण के खिलाफ आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है।
ये है मामला
बता दें कि आगरा फतेहपुर सीकरी रोड पर वर्ष 2008 बसपा शासन काल में यूपी सरकार ने तहसील किरावली के गांव महुअर, पाली सदर, बरोदा सदर के किसानों की उपजाऊ जमीन को लेदर पार्क बनाने के लिए अधिग्रहत किया था। उस समय सरकान ने किसानों से परिवार के एक सदस्य को पार्क में नौकरी व योजना के अन्तर्गत अन्य लाभ देने का वायदा किया था। जिस पर किसान राजी हो गए। यूपी सरकार ने 10.28 लाख रुपए प्रति बीघा के हिसाब से किसानों की 111.39 हैक्टेयर जमीन को लेदर पार्क बनाने के लिए अधिग्रहत किया था। जिसके बाद लेदर पार्क बनने का काम शुरू हो गया। पार्क में बाउंड्रीवॉल व बिजली पोल अथवा सड़क डलनी शुरू हो गई है लेकिन एनजीटी ने साल 2010 में पर्यावरण खराब होने का हवाला देकर काम को बंद करा दिया।
सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने नहीं गया कोई किसान
पत्रिका टीम से बात करते हुए गांव बरोदा सदर निवासी भगवानदास सोलंकी ने बताया है कि सरकार ने उनकी 50 बीघा जमीन लेदर पार्क बनाने के लिए अधिग्रहत की थी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से कोई लेना देना नही है। कोई किसान सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ने नहीं गया है। हमें उचित मुआवजा मिले। हमारी अच्छी भूमि है। मीठा पानी है। सरकार ने हमारी जमीन 10.28 लाख रुपए बीघा के हिसाब से ली है। जबकि उस समय 70 लाख रुपए बीघा की सर्किल रेट थी। हमारे साथ में अन्याय हुआ है। सरकार लेदर पार्क बनाए या कुछ भी बनाए हमें चार गुना मुआवजा चाहिए। अगर मुआवजा नहीं मिला तो किसान आंदोलन करेगा।
सुप्रीम कोर्ट से कोई लेना देना नहीं है
लेदर पार्क निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट दो हफ्तों के बाद सुनवाई करेगा। इसको लेकर तहसील किरावली के गांव सकतपुर निवासी राकेश सोलंकी ने पत्रिका टीम से बात करते हुए बताया है कि सरकार ने लेदर पार्क बनाने के लिए उनकी 6.50 बीघा जमीन अधीग्रहित किया था। उनके पूरे परिवार की 48 बीघा जमीन अधिग्रहित हुई थी। राकेश ने कहा है कि अब इसका सुप्रीम कोर्ट का क्या लेना देना है। सुप्रीम कोर्ट से लेना देना इसलिए नहीं है क्योंकि पहले आपने जब जमीन ली थी तो मानक क्यों पूरे नहीं किए। किसानों को करार के अनुरूप कोई लाभ नहीं मिला। अब हम अपनी जमीन वापस लेना चाहते हैं। अगर सरकार क्षेत्र का विकास करना चाहती है। उद्योग लगाना चाहती है। तो सरकार को किसानों की जमीन का चार गुना मुआवजा देना होगा।
निर्माण कार्य नहीं होने देंगे
राकेश सोलंकी ने कहा है कि किसान उद्योग के विरोधी नहीं है। किसानों ने कहा है कि जब सुप्रीम कोर्ट में लेदर पार्क को लेकर इतने साल खिंच गए हैं तो लेदर पार्क छोड़ दो। सरकार इस जमीन पर आईटी हब बना सकती है। रक्षा मंत्रालय की ईकाई बना सकती है। जिस पर मानक पूरे हो उस उद्योग को सरकार बनवा दे। लेकिन जमीन पर कोई काम नहीं होने के कारण किसान को बहुत नुकसान हो रहा है। किसान बेरोजगार हो गया है। जमीन अधिग्रहण के समय किसानों को बड़े बड़े सपने दिखाए गए थे। हाइवे के किनारे वाली जमीन को सर्किल रेट से भी कम में खरीदा है। पत्रिका से बात करते हुए किसानों ने कहा है कि अगर सरकार ने चार गुना मुआवजा दिए बगैर इस जमीन पर कोई भी काम किया तो उसे नहीं होने देंगे। इसके लिए किसानों को आंदोलन भी करना पड़ेगा तो करेंगे। भूखे बैठ जाएंगे क्योंकि भूखे तो मर चुके हैं।
ये लड़ाई चलती रहेगी
गांव सकतपुर निवासी किसान मेहताब सिंह ने पत्रिका टीम को बताया कि 3.25 बीघा जमीन उनकी निर्माणाधीन लेदर पार्क के लिए सरकार ने अधिग्रहत की थी। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई को लेकर उन्होंने कहा कि ये लड़ाई पर्यावरण और सरकार की है। यह लड़ाई तो चलती रहेगी। किसानों का नुकसान हो रहा है। किसान को बारह साल हो गए है। सरकार या तो हमारी जमीन वापस करे नहीं तो जमीन का चार गुना मुआवजा किसानों को दे। बच्चों की नोकरी चाहिए। पुर्नावास नीति मिली चाहिए। इसके अलावा फ्री भूखंड चाहिए। गांवो की बिजली का बिल फ्री होना चाहिए। 17/4 की धारा लगाकर सरकार ने किसानो से जबरदस्ती जमीन छीन ली है। अगर मानक पूरे न होने के कारण लेदर पार्क नही बन रहा तो सरकार आईटी हब बना सकती है।
जमीन वापस करे सरकार
गांव महुअर निवासी मानेन्द्र दीक्षित ने पत्रिका टीम से बात करते हुए बताया कि उनकी 5 बीघा जमीन सरकार ने अधिग्रहत की थी। परिवार की 15 बीघा जमीन अधिग्रहत हुई थी। सरकार हमारी जमीन का चार गुना मुआवजा दे। अन्यथा जमीन वापस कर दे। अगर सरकार ऐसा नही करती है तो किसान आंदोलन करेगा। इसका अलावा किसानो के पास दूसरा कोई चारा नही है।
ये बोले किसान नेता
पत्रिका टीम से बात करते हुए किसान नेता श्याम सिंह चाहर ने बताया है कि 2008 में सरकार ने किसानों से जमीन ली थी। उसका मुआवजा सरकार ने किसानों को पूरा नहीं दिया है। सरकार ने जीओ का पालन नहीं किया है। अगर सरकार जमीन पर निर्माण करना चाहती है तो यू पी सरकार को चार गुना मुआवजा देना होगा। अन्यथा किसी भी कीमत पर किसान अपनी जमीन पर निर्माण नहीं होने देगा।
इनपुट: देवेश शर्मा
Updated on:
31 Jan 2020 06:06 pm
Published on:
31 Jan 2020 05:14 pm
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