
Mowgli
आगरा। मोगली का नाम तो आपने सुना ही होगा। वही रूपयार्ड किपलिंग के उपन्यास जंगल बुक का नायक। बघीरा, बालू, हाथी, रामा आदि उसके दोस्त थे। मोगली ने शेरखान के अत्याचार से जंगल को बचाया था। मोगली पर कई फिल्म बन चुकी हैं। यह भले ही किताब की बात हो, लेकिन आगरा में सचमुच का मानव भेड़िया पकड़ा गया था। काफी प्रयासों के बाद उसे मानव नहीं बनाया जा सका। 1901 में उसकी मृत्यु हो गई थी।
यह भी पढ़ें
1867 में पकड़ा गया था
बात 1867 की है। 151 साल हो गए हैं। तब आगरा में चारों ओर जंगल था। आगरा किला और उसके एक ओर कुछ बस्तियां थीं। ब्रिटिशर्स का अधिकांश समय शिकार करने में बीतता था। ऐसे ही ब्रिटिश शिकारियों ने शिकार के दौरान जंगल में छह साल के मानव बालक को देखा। उसकी हरकतें पशु जैसी थीं। जंगल में मानव बालक को देखकर शिकारी हतप्रभ रह गए। उन्होंने बालक को पकड़ने का प्रयास किया। इस पर एक मादा भेड़िया ने शिकारियों पर हमला कर दिया। इस पर शिकारियों ने मादा भेड़िया को गोली मार दी। यह माना गया था कि यही मादा भेड़िया मानव के बालक को पाल रही थी। मानव का बालक इसका दूध पीता था।
यह भी पढ़ें
29 साल तक सिकंदरा में रहा
अंततः बालक को पकड़ लिया गया। अंग्रेजों ने इसका नाम डायना शिंचर रखा। लोग इसे मानव भेड़िया कहने लगे। वह जानवरों की तरह चलता था। घुर्राता था। कच्चा मांस खाता था। अंग्रेजों ने उसे अकबर का मकबरा सिकंदरा में रखा। बहुत प्रयास किया कि वह मानव की तरह व्यवहार करे। अंग्रेजों को सफलता नहीं मिली। सन 1901 में 34 साल की आय़ु में डायना शिंचर की मृत्यु हो गई।
यह भी पढ़ें
मोगली की कहानी ताजा
इतिहासकार राजकिशोर राजे ने इस तथ्य का उल्लेख अपनी पुस्तक तवारीख-ए-आगरा में किया है। उन्होंने बताया कि मानव भेड़िया को देखने के लिए प्रतिदिन लोग पहुंचते थे। उन्होंने कहा कि यह ताज्जुब की बात है कि मानव के बालक को मादा भेड़िया पाल रही थी। आमतौर पर भेड़िया तो मानव को देखते ही हमला कर देता है। ऐसे में मोगली की कहानी ताजा हो जाती है। मोगली को भी मादा भेड़िया ने पाला था।
यह भी पढ़ें
Published on:
11 May 2018 09:15 am
बड़ी खबरें
View Allआगरा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
