
ईंटों व लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित एक विशाल वर्गाकार तालाब है, जिसके बीचो बीच एक दो मंजिला अष्टभुजाकार भवन है, जिस पर गुम्बद बना हुआ है।

भवन तक पहुंचने के लिए 21 मेहराबों पर बना एक पक्का पुल है। तालाब के पास 5 पक्के घाटों के अवशेष भी मिले हैं।

पास ही में उसका एक मंजिली मकबरा भी बना हुआ है। यहां तालाब के तल में खुदाई में अनेक बौद्धकालीन मुर्तियां व संरचनायें भी प्राप्त हुई हैं।

प्रारम्भ में इसका बोधि ताल का नाम था। बाद में बिगड़कर बुढ़िया का ताल हो गया। यह बौद्ध धर्म का प्रतीक है। लोगों का मानना है कि किसी समय में यहां भगवान बौद्ध आये थे।

बुढ़िया के ताल में बौद्ध धर्म के अवशेष मिलते हैं। यह इन्हीं विरासतों का एक हिस्सा है। इसके संरक्षण की जरूरत है।

यहां सिंगाड़े की खेती तथा आम, जामुन आदि के फसलों की नीलामी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की जाती है।