
Budhiya ka Taal
आगरा। एत्मादपुर तहसील अंतर्गत राष्ट्रीय राजमार्ग दो के पास बुढ़िया का ताल स्थित है। पुरातत्व विभाग के नक्शे में 43 और 44 नंबर पर इनका जिक्र है। इसका संरक्षण पुरातत्व विभाग द्वारा किया जा रहा है। ईंटों व लाल बलुआ पत्थरों से निर्मित एक विशाल वर्गाकार तालाब है, जिसके बीचो बीच एक दो मंजिला अष्टभुजाकार भवन है, जिस पर गुम्बद बना हुआ है। भवन तक पहुंचने के लिए 21 मेहराबों पर बना एक पक्का पुल है। तालाब के पास 5 पक्के घाटों के अवशेष भी मिले हैं। इस स्थान को अकबर के दरबारी ख्वाजा एत्माद्खान का निवास बताया जाता है। पास ही में उसका एक मंजिली मकबरा भी बना हुआ है। यहां तालाब के तल में खुदाई में अनेक बौद्धकालीन मुर्तियां व संरचनायें भी प्राप्त हुई हैं। प्रारम्भ में इसका बोधि ताल का नाम था। बाद में बिगड़कर बुढ़िया का ताल हो गया। यह बौद्ध धर्म का प्रतीक है। लोगों का मानना है कि किसी समय में यहां भगवान बौद्ध आये थे। बुढ़िया के ताल में बौद्ध धर्म के अवशेष मिलते हैं। यह इन्हीं विरासतों का एक हिस्सा है। इसके संरक्षण की जरूरत है।
इसकी खेती के लिए है मशहूर
यहां सिंगाड़े की खेती तथा आम, जामुन आदि के फसलों की नीलामी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा की जाती है। वर्तमान समय में यह स्मारक चारों ओर से घिरता चला आ रहा है। अनेक अवैध निर्माण तथा पूजा स्थल इसको घेरने के उद्देश्य से किये जा रहे हैं। बुढ़िया का ताल प्रायः सूख जाया करता है। इस कारण आस पास के गांवों में जल का स्तर नीचे चला गया है। इन गांवों में गिरते जलस्तर व दूषित पानी का एक मात्र कारण बुढ़िया ताल का सूख जाना है। ऐतिहासिक बुढ़िया का ताल चावली माइनर का टेल प्वाइंट है। चार दशक पहले तक यहां 300 घनमीटर से अधिक का जल संचय होता था जिसके चलते आसपास के गांव व एत्मादपुर का जलस्तर 70 से 80 फीट था। धीरे-धीरे नहरों का अस्तित्व खत्म होता गया और यह विशाल जलाशय सूख गया। आसपास का पानी दूषित हो गया है, तथा जलस्तर बढ़कर 200 फीट से ऊपर पहुंच गया। यहाँ असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता है।
होते हैं अनैतिक कार्य
आज यहां अनैतिक काम होते हैं। लोग जुआ खेलते हैं, शराब पीते हैं, तालाब सूखने के कारण सिंघाड़े की खेती ख़त्म हो गयी है। लोग आस-पास के तालाबों से सिंघाड़े लाकर इस ताल के पास बेचते हैं। पुरातत्व विभाग द्वारा यहां तीन कर्मचारी नियुक्त किये गए हैं, जिनकी ड्यूटी सुबह आठ बजे से शाम पांच बजे तक है। बुढ़िया के ताल में बने स्तूप के चारों ओर पानी का संचय करके इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाये तो पर्यटकों के लिए ये बहुत ही मनोहारी होगा। इसे पर्यटक निश्चित ही देखने आयेंगे।
ये की मांग
आरटीआई एक्टिविस्ट नरेश पारस ने मांग की कि बुढ़िया के ताल पर उगी झाड़ियों की सफाई करायी जाए। पीछे से आने वाले बम्बे से तालाब में पानी का संरक्षण किया जाए। इसे पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाए। बुढ़िया के ताल को उसके वास्तविक स्वरूप में लाया जाए, जिससे बौद्ध धर्म के अवशेषों का संरक्षण हो सके।
Published on:
01 Nov 2018 02:08 pm
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