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भगवान भावुक हुआ तो चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट हुआ

चैतन्य महाप्रभु भाव कथा में श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी ने चैतन्य महाप्रभु की बाल व युवावस्था की लीलाओं का किया वर्णन

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आगरा

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Abhishek Saxena

Dec 22, 2018

chaitanya mahaprabhu

भगवान भावुक हुआ तो चैतन्य महाप्रभु के रूप में प्रकट हुआ

आगरा। चैतन्य महाप्रभु भारत के पहले महापुरुष थे, जिन्होंने एकांत के विषय (संकीर्तन) को गलियों और मुहल्लों तक पहुंचाया। जो आनन्द हिमालय की गुफाओं में तप से प्राप्त होता है, उसे कीर्तन के माध्यम से देश के कोने-कोने तक पहुंचाया। कीर्तन वो है जहां कीर्ति और तन का आकर्षण समाप्त हो जाता है। जो कीर्ति और तन में फंसा है वह सिर्फ नाच सकता है। कीर्तन नहीं कर सकता। मीरा को न तो अपने तन (जान) की चिन्ता थी और न हीं आरोप लगने पर अपनी कीर्ति की। इसीलिए श्रीकृष्ण की भक्ति में रानी मीरा सब लाज छोड़कर पग घुंघरू बांध के नाची थी।

कथा स्थल मंदिर का स्वरूप
कमला नगर, जनक पार्क में वनवासी रक्षा परिवार फाउंडेशन द्वारा आयोजित की जा रही चैतन्य महाप्रभु भाव कथा में वैष्णवाचार्य पुण्डरीक जी महाराज ने व्यास गद्दी पर बैठकर कहा कि व्यास विष्मु का और कथा स्थल मंदिर का स्वरूप है। श्रोता बनने के लिए अपनी पदवियों को त्याग देंगे, तभी कथा का आनन्द ले पाएंगे। संत वो है जो मस्ती में रहे। मस्ती का अर्थ है वो प्रसन्नता जो दूसरों पर निर्भर न हो। चैतन्य महाप्रभु की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि नीलाम्बर चक्रवर्ती ने विश्म्भर रखा था। चैतन्य तो नका कर्म। लेकिन वह चैतन्य नाम से प्रसिद्ध हुए। क्योंकि नाम से बड़ा कर्म होता है। विद्वान होकर वेटी छोड़कर न चला जाए इस भय से मां उन्हें शिक्षा नहीं दिलाना जाहती थीं। लेकिन प्रभु में शिक्षा के प्रति उत्साह था। बाल्यावस्था में ही उन्होंने किस तरह केशव कश्मीरी जैसे महान पंडित को शास्त्रार्थ में पराजित करने का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। वह निमायी पंडित के रूप में लोकप्रिय शिक्षक के रूप में प्रसिद्ध हुए।

स्कूलों में भी हो कथाओं का आयोजन
श्री पुण्डरीक जी महाराज ने कहा कि शिक्षा की दृष्टि से स्कूलों में भी कथाओं का आयोजन किया जाना चाहिए। वर्तमान शिक्षा प्रणाली पर प्रहार करते हुए कहा कि भारत को जैसा वास्कोडिगामा ने देखा आज की शिक्षा प्रणाली में भारत का वहीं दर्शन है। आज शिक्षा का लक्ष्य मात्र अच्छी नौकरी पाना रह गया है। जो स्कूली पढ़ाई में कम होते हैं, उन्हें अक्सर व्यवहारिक जीवन में ऊंचाईयां छूते देखा गया है। दुनिया का कौन सा विकास और विज्ञान है जो भारत में मौजूद नहीं। हमें देश की युवा पीढ़ी में शिक्षा के प्रति उत्साह पैदा करना होगा।

ये रहे मौजूद
इस अवसर पर राधाबल्लभ अग्रवाल, संजय गोयल, भगवान दास बंसल, राजेश अग्रवाल, विवेक मोहन अग्रवाल, अशोक अग्रवाल, सतीश मांगलिक, प्रखर गर्ग, विष्णु दयाल बंसल, मुरारील प्रसाद अग्रवाल, अशोक माहेश्वरी, रमेश चंद मित्तल, रितु अग्रवाल, श्रुति सिंघल, निर्मला, मीनू त्यागी, बबिता गोयल, मीरा अग्रवाल, प्रीति गर्ग, शिल्पा गुप्ता आदि मौजूद थे।