चौधरी चरण सिंह ने गांव के जिस परिवेश में आंख खोली, वहां व्याप्त थी भयानक गरीबी और शोषणवादी व्यवस्था। एक ओर दिन रात खेत में खटता किसान और मजदूर और दूसरी ओर किसान के खून पसीने की फसल को कौडियों के भाव लगातार समृद्ध होता बिचौलिया। इस व्यवस्था को चौधरी चरण सिंह ने बदलने के लिए काम किया। आजादी के बाद 1948 में यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने उन्हें अपना सचिव नियुक्ति किया। पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने 1951 में उन्हें जमींदारी उन्मूलन विधेयक तैयार करने का काम सौंपा। इस विधेयक ने किसानों को वर्षों की पीड़ा से मुक्त करा दिया। खेत जोतने वालों को ऐसा हक हासिल हुआ, जिससे बेदखल संभव नहीं था। उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार का पूरा श्रेय चौधरी चरण सिंह को ही जाता है। लोगों के बीच रहकर अपनी सरलता, सादगी और ईमानदारी से उन्होने बहुत लोकप्रियता हासिल की थी। 1978 में उनका निधन हो गया। उनके निधन से देश और खासकर किसानों की बहुत क्षति हुई। किसानों ने अपना सबसे लोकप्रिय नेता खो दिया।