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दो अप्रैल भारत बंद हिंसा के बाद जेल गए प्रदर्शनकारियों को मिलने लगी जमानत

पुलिस ने लगाई थी संगीन धाराएं, दलित अधिवक्ता ने किया था फ्री में केस लड़ने का एलान

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आगरा

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Abhishek Saxena

May 04, 2018

bharat band

आगरा। एससी एसटी एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट ने बदलाव किया तो भारत बंद के दौरान आगरा में जमकर बवाल हुआ था। इस बवाल में आगरा पुलिस ने 29 लोगों को गिरफ्तार किया और हजारों पर मुकदमा दर्ज किया। जेल गए प्रदर्शनकारियों को अब जमानत मिलना शुरू हो गई हैं। माना जा रहा था कि प्रदर्शनकारियों पर जो संगीन धाराएं लगाई गई थीं, उसके बाद उन्हें कम से कम छह महीने तक जेल में ही रहना पड़ेगा लेकिन, दलितों के मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने दमदारी से पैरवी की और कई लोगों को जमानत मिल गई। दलित परिवारों में इस बात को लेकर खासी खुशी है।


दो दर्जन लोगों को मिली जमानत
अधिवक्ता सुरेश चंद सोनी ने एलान किया था कि दो अप्रैल को जो लोग पुलिस द्वारा पकड़े गए थे, उनके केस निशुल्क लड़े जाएंगे। इसके बाद कई दलित परिवारों ने उनसे मदद मांगी। जिला जज, अपर जिला जज, सीजेएम कोर्ट में सुनवाई के दौरान दलीलें दी गई, जिसके बाद जिला जज कोर्ट से
दो, सीजेएम कोर्ट से दस और एडीजे छह कोर्ट से दो लोगों की जमानत हुई है। जो लोग जमानत के बाद जेल से बाहर आए उन्होंने अधिवक्ता को धन्यवाद दिया। एसीजेएम 12 की कोर्ट में दलील देकर नौ लोगों की जमानत कराई थी।

पुलिस ने पकड़े थे बलवाई, दलित परिवारों ने लगाए आरोप
दो अप्रैल को दोपहर के बाद आगरा शहर में जमकर बवाल हुआ था। जिसमें करोड़ों रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा था। बलवाईयों ने रेलवे ट्रैक भी क्षतिग्रस्त किए थे। वहीं एमजी रोड, बिजलीघर, लोहामंडी सहित कई क्षेत्रों में दुकानों में तोड़फोड़ की गई थी। उपद्रवियों ने बंदुकटरा पुलिस चौकी में आग तक लगा दी थी। जिसके बाद पुलिस ने कई संगीन धाराओं में केस दर्ज कर पकड़े गए लोगों को जेल भेजा था। वहीं दलित परिवारों का कहना था कि पुलिस ने आरोपियों को नहीं पकड़ा। बल्कि निर्दोषों को पकड़कर जेल भेजा है। इसके बाद अधिवक्ता ने दलित लोगों के लिए निशुल्क केस लड़ने का एलान किया था।

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