
Nagar nigam agra
आगरा। नगर निगम सुधरने का नाम नहीं ले रहा है। नगर निगम की जिम्मेदारी है कि कूड़े का ठीक से निस्तारण हो। हकीकत में ऐसा हो नहीं रहा है। नगर निगम ने घर-घर से कूड़ा निस्तारण का ठेका दिया। ठेकेदार ने भुगतान तो पूरा लिया, लेकिन कूड़ा नहीं उठाया। इस बीच नगर निगम में स्ट्रीट लाइट घोटाला हो गया। फिर टिकट घोटाला हो गया। एक जूनियर इंजीनियर और एक लिपिक को निलंबित कर दिया गया है।
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सूरवाटिका में टिकट घोटाला
पहले बात करते हैं आवास विकास कॉलोनी स्थिति सूर वाटिका की। इसे सेंट्रल पार्क के नाम से जाना जाता है। यहां प्रति व्यक्ति दो रुपया प्रवेश टिकट है। अपर नगर आयुक्त अनुपम शुक्ला घूमते हुए सूरवाटिका पहुंचे। उन्होंने टिकट वितरण और प्रवेशित व्यक्तियों की जांच की। 102 प्रवेश टिकट जारी किए गए। नगर निगम के खाते में 204 रुपये जमा कराए गए। आप कहेंगे कि हिसाब तो ठीक है, लेकिन जरा रुकिए। बाबू ने खेल कर दिया। टिकट तो दो रुपये का है, लेकिन इसके पीछे प्रवेश करने वाले व्यक्तियों की संख्या लिखी और 324 लोगों को प्रवेश कराया। इस तरह लिपिक ने 648 रुपये वसूल किए लेकिन खाते में सिर्फ 204 रुपये जमा कराए। 444 रुपये उसने अपनी जेब के हवाले कर लिए। लिपिक लोकेन्द्र परिहार से पूछताछ हुई। लिपिक ने खूब जुगाड़ लगाई, लेकिन कुछ काम नहीं आया। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने निलंबित कर दिया।
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स्ट्रीट लाइट घोटाला
नगर निगम के प्रकाश विभाग में हैं जूनियर इंजीनियर सुरेश चंद्र शर्मा। इन्हें सडकें रोशन करने के लिए स्ट्रीट लाइटें दी गईं। इन महाशय ने स्ट्रीट लाइट अपने उखर्रा स्थित घर में ले जाकर रख लीं। दीपावली से पूर्व पुलिस के सहयोग से इनके घर से स्ट्रीट लाइट बरामद की गईं। इस मामले में खूब बयानबाजी हुई। जेई ने निलंबित होने से बचने के लिए हाथ-पांव मारे। अंततः शनिवार को देर शाम अगर आयुक्त ने निलंबन आदेश जारी कर दिया।
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Published on:
01 Dec 2019 09:41 am

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