
bharat bandh
आगरा। अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में संशोधनों को लेकर दलित नाराज हैं। केन्द्र सरकार बार-बार कह रही है कि अधिनियम में दलितों के अधिकारों में कोई कटौती नहीं होगी। इसके बाद भी दलितों को भरोसा नहीं हो रहा है। दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग भी की जाएगी। घटना में इसे देखते हुए दलितों ने भारत छोड़ो आंदोलन के मौके पर नौ अगस्त को भारत बंद का आह्वान किया है।
यह भी पढ़ें
आगरा में तैयारी
आगरा को दलितों की राजधानी कहा जाता है। भारत बंद का असर आगरा में होगा या नहीं, यह अभी नहीं कहा जा सकता है। पुलिस ने अपने स्तर से पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन कहीं से ऐसी सूचना नहीं मिली है कि आगरा में भारत बंद होगा। फिर भी पुलिस ने तैयारी कर रखी है। थानाक्षेत्र वार ड्यूटी लगा दी गई है। पुलिस अधीक्षक नगर प्रशांत वर्मा ने इस बारे में एक आदेश जारी किया है। थानाध्यक्षों से कहा है कि वे निरंतर भ्रमण पर रहें।
यह भी पढ़ें
पुलिस क्यों है चिन्तित
भारत बंद को लेकर पुलिस की चिन्ता वाजिब है। असल में दो अप्रैल को भारत बंद का आगरा में सर्वाधिक असर हुआ है। दलितों ने पांच घंटे तक जिला मुख्यालय कलक्ट्रेट पर कब्जा कर लिया था। भारतीय जनता पार्टी के महानगर अध्यक्ष विजय शिवहर के होटल मोती पैलेस में जमकर तोड़फोड़ की थी। बुन्दूकटरा पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया था। वीआईपी रोड पर आगजनी की थी। छीपीटोला में तो फायरिंग भी हुई थी। अचानक हुए इस घटनाक्रम से पुलिस के हाथ-पांव फूल गए थे। पुलिस कुछ भी नहीं कर पाई थी। इसका कारण यह था कि भारत बंद के बारे में मीडिया तक को सूचना नहीं थी। अचानक हिंसा भड़की तो पता चला कि लम्बे समय से तैयारी की जा रही थी। इसलिए पुलिस कोई खतरा मोल नहीं लेना चहती है।
यह भी पढ़ें
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
दलितों का कहना है कि मोदी सरकार अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम को कमजोर कर रही है। तत्काल गिरफ्तारी न होने से दलित उत्पीड़न के मामले बढ़ेंगे। दलितों के साथ पहले से ही अत्याचार हो रहा है। केन्द्र सरकार के नए प्रावधान से समस्या बढ़ जाएगी। ज्ञात रहे कि 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट 1989) के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि इस एक्ट का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। कोर्ट का आदेश था कि ऐसे मामलों में शिकायत मिलने पर तुरंत मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। सबसे पहले शिकायत की जांच डीएसपी स्तर के पुलिस अफसर द्वारा शुरुआती जांच की जाएगी। सात दिनों के अंदर जांच पूरी करनी होगी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसे मामलों में सरकारी कर्मचारी अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
Updated on:
09 Aug 2018 04:02 pm
Published on:
09 Aug 2018 07:06 am
बड़ी खबरें
View Allआगरा
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
