
Diwali 2018: दिवाली पर करेंगे ये उपाय तो मां लक्ष्मी होंगी प्रसन्न
आगरा। दीपोत्सव पर्व की शुरुआत धनतेरस के साथ शुरू हो चुकी है। इस दीपावली को अलग और खास बनाने के लिए हर कोई आतुर है। भगवान गणेशजी के विशेष दिन यानि बुधवार को दीवाली है। इसलिए प्रथमपूज्य की पूजा इस बार दरिद्रता को दूर करेगी। वहीं ज्योतिषाचार्य और वैदिक सूत्रम के चेयरमैन द्वारा कुछ विधि बताई गई हैं, जिनके माध्यम से पूरे साल धन की कमी नहीं होगी।
ऐसे करें श्रीगणेश की पूजा
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने दीपोत्सव पर्व पर श्री गणेश लक्ष्मी की पूजा पद्धति के बारे में बताते हुए कहा कि मां लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत उनके वस्त्र से करें। उनकी पसंदीदा रंग लाल, गुलाबी और पीला है। उनके लिए वस्त्र खरीदते हुए ध्यान रखें कि आप इस रंग के वस्त्र जरूर खरीदें जो मां लक्ष्मी को अति प्रिय हों। दीपावली के पूजन के दिन उनके स्थान को शुद्ध जल से धोकर सुगंधित करने के लिए केवड़ा, गुलाब और चंदन के इत्र का इस्तेमाल करें। मां लक्ष्मी को लाल रंग के पुष्प, सफेद मिठाइयां, कमल के फूल अति प्रिय है। पूजा में फलों का भी खास महत्व होता है। फलों में मां लक्ष्मी को श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े पसंद आते हैं। माता लक्ष्मी के स्थान को सुगंधित करने के लिए केवड़ा, गुलाब और चंदन के इत्र का इस्तेमाल करें। दीपावली के पूजन में दीपक के लिए आप गाय के घी, मूंगफली या तिल के तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह मां लक्ष्मी को शीघ्र प्रसन्न करते हैं। पूजा के लिए महत्वपूर्ण दूसरी चीजों में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र शामिल हैं।
ऐसे लगाएं चौकी
वैदिक सूत्रम चेयरमैन पंडित प्रमोद गौतम ने बताया कि दीपावली की रात्रि पूजा की तैयारी करने के बाद सबसे पहले चौकी पर मां लक्ष्मी व गणेश की मूर्तियां इस प्रकार रखें कि उनका मुख पूर्व या पश्चिम में रहे। चौकी पर लक्ष्मीजी, गणेशजी की दाहिनी ओर रहें। पूजा करने वाले मूर्तियों के सामने की तरफ बैठे। कलश को लक्ष्मीजी के पास चावलों पर रखें। नारियल को लाल वस्त्र में इस प्रकार लपेटें कि नारियल का अग्रभाग दिखाई देता रहे व इसे कलश पर रखें। दीपावली की पूजा पद्धति में यह कलश वरुण का प्रतीक है। दो बड़े दीपक रखें। एक में घी भरें व दूसरे में तेल। एक दीपक चौकी के दाईं ओर रखें व दूसरा मूर्तियों के चरणों में। इसके अलावा एक दीपक गणेशजी के पास रखें। पूजा की थाली मूर्तियों वाली चौकी के सामने छोटी चौकी पर रखकर उस पर लाल वस्त्र बिछाएं। कलश की ओर एक मुट्ठी चावल से लाल वस्त्र पर नवग्रह की प्रतीक नौ ढेरियां बनाएं। गणेशजी की ओर चावल की सोलह ढेरियां बनाएं और श्री गणेश को दूर्वा घास चढ़ाएं। ये सोलह मातृका की प्रतीक हैं।
थाली में रखें ये वस्तुए
थालियों की निम्नानुसार व्यवस्था करें- 1- ग्यारह दीपक, 2- खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान, 3. फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक। इसके बाद इन थालियों के सामने पूजा करने वाला बैठे। आपके परिवार के सदस्य आपकी बाईं ओर बैठें। कोई आगंतुक हो तो वह आपके या आपके परिवार के सदस्यों के पीछे बैठे। इसके बाद पूजन सामग्री व स्थापित चौकी पर गंगाजल छिड़कर श्री गणेश लक्ष्मीजी का तिलक करके दीपावली का पूजन आरम्भ करें और पूजन के बाद श्री गणेश चालीसा पढ़ें एवम श्री सूक्त का भी पाठ करें। अंत में क्षमा याचना करें और श्री गणेश लक्ष्मीजी से अपने परिवार के ऊपर आश्रीवाद के लिए विनम्र निवेदन व प्रार्थना करें।
इस मंत्र से दूर होगी दरिद्रता
पंडित प्रमोद गौतम ने दीपावली की रात्रि पूजन के दौरान ‘अष्टलक्ष्मी’ की पूजा पद्धति के सन्दर्भ में बताते हुए कहा कि सर्वप्रथम एक थाली में अष्टदल कमल बनाकर पारद या स्फटिक का ‘श्रीयंत्र’ स्थापित कर उसकी पंचोपचार या षोडषोपचार पूजन करें फिर निम्न मंत्र की एक सौ आठ माला से जप करें। यह जप कमलगट्टे की माला से करना आवश्यक है।
मंत्र- ‘ ॐ ह्रीं दारिद्रय विनाशिन्यै अष्टलक्ष्म्यै नम:॥’
इसके बाद ‘श्रीयंत्र’ को अपनी तिजोरी में स्थापित करें। दीपावली के दिन इस प्रयोग को संपन्न करने से जीवन में कभी भी धनाभाव नहीं होता है।
Published on:
05 Nov 2018 10:00 am
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