
आज यानी आठ नवंबर को देवउठनी एकादशी है। इसे देवोत्थान, देव प्रबोधिनी एकादशी और बड़ी एकादशी भी कहा जाता है। इस दिन जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु चार माह की निद्रा से जागते हैं। देवउठनी एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्य शुरू हो जाते हैं। चतुर्मास की निद्रा से जागने के बाद भक्त भगवान विष्णु का भव्य स्वागत करते हैं। व्रत व पूजन विधि विधान से करते हैं। माना जाता है कि आज के दिन व्रत व भगवान का पूजन करने वाले को बैकुंठ की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र का कहना है कि देवोत्थान एकादशी पर कुछ नियमों का पालन करना जरूरी होता है। जानें एकादशी के नियम।
1. तुलसी का पत्ता भूलकर भी न तोड़ें
आज का दिन भगवान विष्णु और माता तुलसी के विवाह का दिन माना जाता है। इस दिन तुलसी का पत्ता तोड़ने की भूल न करें। बल्कि तुलसी माता का पूजन करें।
2. इन चीजों का न करें सेवन
देवोत्थान एकादशी का भी भगवान विष्णु को अति प्रिय होता है। आज के दिन अगर व्रत न भी रख रहे हों तो प्याज, लहसुन, अंडा, मांस, मदिरा आदि तामसिक चीजें न खाएं। साथ ही पति पत्नी शारीरिक संबन्ध बनाने से परहेज करें। मान्यता है कि ऐसा करने वालों को यमराज का कठोर दंड भोगना पड़ता है।
3. चावल न खाएं
शास्त्रों में एकादशी के दिन चावल या चावल से बनी चीजों के खाने के लिए मना किया गया है। इसलिए आज के दिन चावल न खाएं।
4. ऐसा करने से रूठ जाएंगी मां लक्ष्मी
घर में अपने बजुर्गों का अनादर न करें। क्लेश, झगड़ा न करें वर्ना माता लक्ष्मी रूठ जाती हैं। मान्यता है कि इस दिन घर में शांति और सद्भाव बनाए रखने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।
5. दिन में न सोएं
देवोत्थान एकादशी का दिन शास्त्रों में बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। लिहाजा इसे सोने में न गवांए। आज के दिन भगवान के मंत्रों का जाप करें। भजन करें, कथा कहें अथवा सुनें। व्रत न कर सकें तो कम से कम पूजन अवश्य करें। दिन में द्वादशी के दिन भी न सोएं। हालांकि बीमार और असमर्थ लोगों के लिए इन नियमों में छूट है।
ये काम अवश्य करें
देवोत्थान एकादशी के दिन दीपदान का विशेष महत्व है। आज की रात घर में अखंड दीप जलाएं और घर की छत पर कुछ दीप जलाएं। कोशिश करें कि इस रात घर के किसी कोने में अंधकार न रहे। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है।
Published on:
08 Nov 2019 11:05 am
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