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देश में खाद्यान की कोई कमी नहीं, फिर भी भुखमरी… डॉ. कृष्ण गोपाल ने बताया बड़ा कारण

सक्षम मेमोरियल ट्रस्ट और सेवा भारती के संयुक्त तत्वाधान में शुरू हुई अंत्योदय अन्नपूर्णा योजना का शुभारम्भ करने आये राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल

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आगरा

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Dhirendra yadav

Oct 17, 2018

Dr. Krishna Gopal

Dr. Krishna Gopal

आगरा। सक्षम मेमोरियल ट्रस्ट और सेवा भारती के संयुक्त तत्वाधान में शुरू हुई अंत्योदय अन्नपूर्णा योजना का शुभारम्भ करने आये राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ के सहसरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि देश में खाद्यान की कोई कमी नहीं है, फिर भी भुमखरी है, इसका बड़ा कारण है। आज एक ऐसा वर्ग है, जो इस खाद्यान्न को खरीद नहीं पा रहा है।

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ये बोले डॉ. कृष्ण गोपाल
डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि भारत का एक मन है, जिसके कारण यह बात याद आई। भारत वर्षो से सश्यश्यामला रहा है। आठ सौ वर्ष कठिनता के साथ गुजरे, जिसके कारण देश गरीब देश में बदल गया। दुनिया के कारोबार पर भारत का 31 फीसद कब्जा था, लेकिन आज केवल दो फीसद है। देश को लोगों ने लूटा, जिसकी बदौलत देश दुनिया के गरीब देशों की सूची में आ गया। देश आज बारह करोड़ टन गेंहू पैदा करता है। देश की आबादी 40 करोड़ से 136 करोड़ हो गयी। देश के पास आज भी खाद्याान्न बहुत है। देश में आज भी खाद्यान्न की कमी नहीं है। देश में आज एक वर्ग ऐसा है जो खरीद नहीं सकता है। जो गरीब है उसके पास रोजगार भी नहीं है। देश में ऐसे भविष्य निर्माण की जरूरत है स्वावलंबी बने। देश में ऐसे व्यक्तित्व के निर्माण की जरूरत है जो अतिथि देवो भव की परंपरा पर चले। लोगों की जिम्मेदारी केवल सरकार पर नहीं बल्कि संवेदन शील लोगों पर ही है। हजारो वर्षों से भारत में यही परंपरा है। 100 हाथों से कमाना पर्याप्त नहीं है बल्कि 1000 हाथों से इसे बांटना पर्याप्त है। यह भारतीय दर्शन है। पहली रोटी चूले को, गाय को, आगंतुक को श्वान को उसके बाद स्वयं खाते हैं। यह दर्शन दुनिया में नही है केवल भारत में है। ईश्वर कण कण में है। पढ़े लिखे और अनपढ़ लिखे व्यक्ति का ईश्वर अलग नहीं है।

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ये है सच्ची सेवा
डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा दुखी व्यक्ति के मन में प्रवेश करके दुखी होना सच्ची सेवा है। यह भारत का अध्यात्म है। यह भारत के हर नागरिक में है। अमेरिका के आये तूफान में भारत के लोगों ने मदद की, जबकि अमेरिकन लोगों ने सरकार का काम मानकर उन्होंने मदद नहीं की। केदारनाथ की बाढ़ और केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जगह हजारों टन समान पहुंचा। भारत का हिन्दू समाज संवेदनशील है, जो लोगों की वेदना का अनुभव करता है। दिल्ली में लोग अस्पतालों के बाहर 2500 लोगों को खाना मुफ्त मिलता है। बीमार लोगों के परिवार के लोगों को ठहरने की व्यवस्था कराते हैं। आगरा के लोग बद्रीनाथ और केदारनाथ के अस्पतालों में सेवा करते हैं। समाज में देने वाले लोग बहुत होते हैं, लेकिन हर कोई अग्रेसर नहीं बनता। संपदा अच्छे काम में लगकर लक्ष्मी का रूप धारण कर लेती है, जिससे नारायण की सेवा की जाती है। यज्ञ कुंड में जलने वाली राख विभूति बन जाती है। भूखा आदमी चोरी, लूट, हत्या भी कर सकता है, इसलिए समाज के लोगों का उसके प्रति कर्तव्य है।

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