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आगरा में इंजीनियर ने बिना मिट्टी के पानी में उगा दी सब्जियां, चारों ओर हो रही वाहवाही

पानी में नियंत्रित जलवायु रखकर बिना मिट्टी के पौधे उगाने की विधि कहलाती है हाइड्रोपोनिक्स इसी विधि का इस्तेमाल करते हुए इंजीनियर अरुण अग्रवाल ने लॉकडाउन में पेश की नजीर

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आगरा

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shivmani tyagi

Oct 26, 2020

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पानी में नियंत्रित जलवायु रखकर बिना मिट्टी के पौधे उगाने की विधि कहलाती है हाइड्रोपोनिक्स

पत्रिका न्यूज़ नेटवर्क

आगरा। जरा सोचिए क्या बिना मिट्टी के खेती की जा सकती है ? अगर इस सवाल को सुनकर आप संकोच में पड़ गए हैं तो जान लीजिए कि आगरा में एक इंजीनियर ने यह कारनामा कर दिखाया है। देश में जब लॉकडाउन शुरू हुआ तो इंजीनियर अरुण अग्रवाल ने पानी में ही सब्जियां उगाने की साेची। पहले तो यह मुश्किल लगा लेकिन अब उनकी खेती खूब फल-फूल रही है और पाइपों में चल रहे पानी के बीच ही उनकी किचन गार्डन में टमाटर, भिंडी, करेला, धनिया और गंवारफली समेत तमाम सब्जियां उग रही हैं।

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आगरा के रहने वाले अरुण अग्रवाल इंजीनियर हैं लेकिन देश में जब लॉकडाउन लगा तो उन्हें भी घर पप बैठना पड़ा। बाजार में सब्जियां तक नहीं मिल रही थी। ऐसे में उनके दिमाग में ख्याल आया कि घर पर ही खेती की जाए लेकिन उनके पास इतनी जगह नहीं थी। इसके बाद उन्होंने इजराइल में अपनाई जाने वाली तकनीक हाइड्रोपोनिक्स को आजमाया और घर में बिना मिट्टी के खेती करने की ठानी। इसके बाद उन्होंने अपने घर में पाइपों का जाल बिछाया और इन पाइपों के अंदर एक नियंत्रित तापमान पर पानी का प्रवाह किया और वहीं पर खेती करनी शुरू कर दी। इंजीनियर का यह फार्मूला काम कर गया और उनके घर में एक बेहतरीन किचन गार्डन तैयार हो गया।

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इस तकनीक को हिंदी में 'जल संवर्धन' और इंग्लिश में 'हाइड्रोपोनिक' कहते हैं। इस तकनीक में फसलों को बिना खेत में लगाए केवल पानी में उगाया जाता है। खेती के इस तरीके काे 'जलीय कृषि' भी कहा जाता है। खेती कि यह तकनीक पर्यावरण के लिए काफी अच्छी है। इस तकनीक में कम पानी का प्रयोग होता है और पानी की भी अच्छी खासी बचत हो जाती है। हाइड्रोपोनिक तकनीक से अच्छी सब्जियां उगाई जा सकती हैं और इस तकनीक से उगाई गई सब्जियों में बीमारियां भी कम लगती हैं। इस तकनीक से कोई भी व्यक्ति फ्लैट कल्चर में भी अपने घर किचन गार्डन बना सकता है। केवल इस तकनीक में सूरज की रोशनी की आवश्यकता पड़ती है। प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया से पौधे अपना भोजन बनाते हैं और फिर उनका विकास होता है।