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आगरा। यह पिता-पुत्र के बुभुक्षा, बेबसी, बीमारी, बैंक बैलेंस की कहानी है, जो उनकी मौत के बाद प्रकाश में आई है। यह कहानी पड़ोसियों की बेरुखी की भी है। बीमार पिता की देखभाल करते-करते बेटा भी बीमार हो गया। अंततः दोनों की मौत हो गई। पिता की रात में तो पुत्र की सुबह। मौत का कारण बीमारी है। ऐसा नहीं है कि वे गरीब थे। उनके बैंक खाते में पांच लाख रुपये जमा हैं। घर में भी नकदी है। इसके बाद भी भूखे थे। कुछ खाते नहीं थे। इलाज नहीं कराते थे। बस घर में बंद रहते थे। पड़ोसियों से बात नहीं करते थे। इसके चलते पड़ोसियों ने भी चिन्ता नहीं की। परिणाम दोनों तिल-तिलकर मरते रहे। हेतचंद को तो किसी ने दो माह से नहीं देखा था।
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दो मंजिला मकान
थाना नाई की मंडी इलाके में हल्का पीर मदन मोहल्ला है। यहीं पर हेतचंद (65 वर्षीय) पुत्र भारूमल अपने 25 वर्षीय पुत्र सोनू के साथ दो मंजिला मकान में रहते थे। पिता का धागा का काम था तो पुत्र पॉली बैग का काम करता था। 20 साल पहले हेतचंद की पत्नी घर छोड़कर चली गई थी। वहां कहां है, कोई नहीं जानता। पत्नी ने उस समय पांच साल के सोनू को साथ ले जाने का प्रयास किया, लेकिन वह पिता के साथ ही रहा। मकान के ऊपरी तल में हेतचंद का अनुज वासुदेव अपनी पत्नी शांति और बेटी पूजा के साथ रहते थे। चार साल पहले वासुदेव की मृत्यु हो गई। पूजा का विवाह थाना जगदीशपुरा के अंतर्गत मारुति एनक्लेव निवासी नीरज के संग हो गया। शादी के बाद शांति भी अपनी बेटी पूजा पास चली गई। इसके साथ ही ऊपर के तल पर ताला लग गया। निचेल तल में हेतचंद और सोनू रह गए।
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सोमवार की रात्रि में मौत
मंगलवार की सुबह सोनू ने अपने दोस्त पड़ोसी लक्की को मोबाइल पर सूचना दी कि पिता की मौत हो गई। साथ ही चाय भी मांगी। लक्की चाय लेकर आया तो देखा कि हेतचंद चारपाई पर मृत पड़ा है। सोनू की स्थिति भी खराब है। लक्की ने आसपास के लोगों को इस बारे में बताया। फिर पुलिस को 112 नम्बर पर सूचना दी गई। थानाध्यक्ष नाई की मंडी संजय कुमार त्यागी ने मौके पर पहुंचकर हेतचंद का शव अंत्य परीक्षण के लिए भेजा। सोनू को एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया। एक घंटे बाद ही सोनू की मृत्यु हो गई। उसके शव का भी पोस्टमार्टम कराया गया।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट
पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ है कि हेतचंद की मौत बीमारी से हुई है। मौत से पांच घंटे पहले तक हेतचंद ने कुछ खाया भी नहीं था। उसकी आंतें सिकुड़ी हुई थीं। सोनू की मौत हार्टअटैक से हुई है। बीमारी के चलते दोनों अशक्त थे। कुछ न खाने के कारण बीमारी बढ़ती चली गई।
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घर में मिली नकदी
पुलिस ने मकान की छानबीन की तो पाया के बेइंतहा गंदगी है। घर में नकदी मिली, जो दो हजार रुपये के आसपास है। पुरानी करंसी भी मिली है। इससे स्पष्ट है कि पैसे की कमी नहीं थी। वे खुद का इलाज नहीं करा रहे थे। घर में गैस सिलेंडर, चूल्हा सबकुछ है, लेकिन उपयोग नहीं किया।
रहते थे भूखे
पड़ोसियों ने बताया कि पिता और पुत्र कई-कई दिन तक घर से बाहर नहीं निकलते थे। बाजार से बेड़ई और चाऊमिन लाकर खाया करते थे। सोनू बाजार से लाता था। एक बार खा लेने के बाद कई दिन तक कुछ नहीं खाते थे। मौत से कई दिन पहले दोनों को किसी ने बाहर नहीं देखा। हेतचंद के भाई की पत्नी शांति देवी का कहना है कि वह बीच में आकर हालचाल लेती रहती थी। उसने इलाज कराने की बात भी कही थी, लेकिन मना कर दिया था। यह रहस्य बना हुआ है कि ठीकठाक पैसा होने के बाद भी पिता-पुत्र भूखे क्यों रहते थे और इलाज क्यों नहीं करा रहे थे?
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कुपोषण का शिकार थे
पड़ोसी बनवारी का कहना है कि जब हमने दोनों का हाल देखा तो उनकी लड़की को फोन किया। वह आई नहीं। इस पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस वाले आ गए। बाप की लाश मिली। लड़के को अस्पताल ले गए, जहां पहुंचते ही वह भी खत्म हो गया। पड़ोसी संतोष कुमार गुप्ता कहना है कि दोनों चाय समोसा खाते थे। और कुछ खाते नहीं थे। इससे कुपोषण का शिकार हो गए। पिता को टीबी की बीमारी थी। लड़का यानी सोनू तो भूख के कारण खत्म हुआ है।
Updated on:
12 Dec 2019 06:20 pm
Published on:
12 Dec 2019 05:59 pm

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