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आगरा के पूर्व नौसेना अधिकारी को कतर में मिली मौत की सजा, परिजनों में कोहराम

Former Navy Commander Arrested in Qatar: कतर में भारतीय नौसेना के पूर्व आठ अफसरों को मौत की सजा सुनाई गई है। इनमें से एक आगरा के रहने वाले हैं। इसकी सूचना मिलने के बाद से उनके परिजनों का बुरा हाल है। आइए जानते हैं पूरा मामला…

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आगरा

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Vishnu Bajpai

Oct 29, 2023

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Former Navy Commander Arrested in Qatar: अरबियन देश कतर की स्थानीय अदालत ने आठ भारतीय पूर्व नौसेना अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई है। इनमें यूपी के आगरा स्थित गांधी नगर के रहने वाले संजीव गुप्ता भी शामिल हैं। संजीव ने भारतीय नौसेना से वीआरएस लिया था। वर्तमान में वे कतर की कंपनी अल दहरा में काम कर रहे थे। हालांकि आगरा स्थित उनके पैतृक मकान पर ताला लगा है। वहीं संजीव को मौत की सजा का ऐलान होने के बाद से उनके परिजन काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि संजीव को मौत की सजा क्यों दी गई। इसकी उन्हें जानकारी नहीं हो पाई है। उनका परिवार फिलहाल केंद्र सरकार से उम्मीदें लगाए बैठा है। संजीव के परिजनों को उम्मीद है कि केंद्र सरकार इस मामले में उनकी मदद करेगी।

अगस्त 2022 से कतर की जेल में बंद हैं 8 पूर्व ऑफिसर
जानकारी के अनुसार भारतीय नौसेना के ये सभी आठ पूर्व ऑफिसर अगस्त 2022 से ही कतर के जेल में बंद हैं। कतर ने अभी तक इन सभी पू्र्व ऑफिसर्स के खिलाफ लगाए गए आरोपों की जानकारी नहीं दी है। हालांकि, मामले से परिचित लोगों का कहना है कि इन सभी पर जासूसी करने का आरोप लगाया गया है। भारत सरकार ने गुरुवार को कहा, "हमें जानकारी मिली है कि कतर की एक अदालत ने अल दहरा कंपनी में काम कर रहे भारत के 8 पूर्व नेवी ऑफिसर की गिरफ्तारी के बाद उन्हें मौत की सजा सुनाई है। मौत की सजा के फैसले से हम हैरान हैं और फैसले की डिटेल्ड कॉपी का इंतजार कर रहे हैं। हम परिवार के सदस्यों और कानूनी टीम के भी संपर्क में हैं। भारतीय नागरिकों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए सभी कानूनी विकल्पों की तलाश की जा रही है।"

गांधी नगर वाले मकान में लगा ताला
दरअसल, आगरा के गांधी नगर निवासी राजपाल गुप्ता रेलवे से रिटायर अधिकारी हैं। पहले वे परिवार के साथ रेलवे कॉलोनी में रहते थे। साल 1992 से वह गांधी नगर में रहते हैं। राजपाल गुप्ता के चार बेटे हैं। इनमें से तीसरे नंबर का बेटा संजीव पूर्व नौसेना अधिकारी है। जो इस समय अरबियन देश कतर की एक कंपनी में काम कर रहा था। वहां उसकी गिरफ्तारी के बाद से गांधी नगर स्थित राजपाल गुप्ता के मकान पर ताला लगा है।

वे दूसरे बेटे के साथ दयालबाग में रहते हैं। गांधीनगर वाले मकान में पहले संजीव का परिवार रहता था, लेकिन संजीव के कतर जाने के बाद उनका परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया। ऐसे में संजीव के पड़ोसियों को भी मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। उनका कहना है कि संजीव से उनकी बात नहीं होती है। कमांडर संजीव गुप्ता के भाई दयालबाग क्षेत्र के सरला बाग और कमलानगर में रहते हैं, एक भाई दिल्ली में रहता है। संजीव की शिक्षा आगरा से पूरी हुई है, लेकिन आगरा में उन्हें जानने वाले कम लोग ही हैं।

संजीव के पिता ने दी पूरी जानकारी
संजीव के पिता राजपाल गुप्ता ने मीडिया को बताया कि उनके बेटे संजीव ने भारतीय नौसेना से वीआरएस ले लिया था। इसके बाद उसने दिल्ली की एक कंपनी में नौकरी शुरू की थी। इसके चलते उसका परिवार दिल्ली शिफ्ट हो गया। दिल्ली में उसे सवा लाख रुपये महीना वेतन मिलता था। इसी बीच उसके दोस्तों ने उसे कतर जाने के लिए तैयार कर लिया। वहां की अल दहरा कंपनी ने उन्हें अच्छे वेतन पर नौकरी का ऑफर दिया था।

इसके बाद साल 2018 में कमांडर संजीव गुप्ता, पत्नी और इकलौती बेटी के साथ कतर चले गए। इस दौरान बीच-बीच में भारत और आगरा परिवार के पास आते रहे। पिता, भाइयों से लगातार फोन पर बातचीत होती थी। राजपाल गुप्ता ने रुंधे गले से बताया कि संजीव आखिरी बार मार्च-2022 में घर आए थे। इसके बाद वे पत्नी और बेटी को दिल्ली में छोड़कर अकेले ही वापस कतर चले गए। फिर भारत नहीं लौटे।

प्रमोद कुशवाह की रिपोर्ट