22 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गोवर्धन परिक्रमा का महत्वपूर्ण पड़ाव ‘पूंछरी का लौठा’

पूंछरी का लौठा भगवान श्रीकृष्ण के मित्र थे। आइए, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पूर्व जानते हैं पूंछरी का लौठा के बारे में।

2 min read
Google source verification
गोवर्धन परिक्रमा पूंछरी का लौठा

पूंछरी का लौठा

मथुरा। गोवर्धन परिक्रमा 21 किलोमीटर की है। गोवर्धन में दानघाटी मंदिर से परिक्रमा शुरू होती है। श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं। रास्ते में पड़ता है पूंछरी का लौठा। पूंछरी का लौठा की कथा चौंकाने वाली है। पूंछरी का लौठा भगवान श्रीकृष्ण के मित्र थे। आइए, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी से पूर्व जानते हैं पूंछरी का लौठा के बारे में।

परिक्रमार्थियों की हाजिरी लेते हैं

पूंछरी का लौठा राजस्थान के भरतपुर जिले के अंतर्गत आता है। यह छोटा सा स्थान है। इसके आसपास बंदरों का जमावड़ा रहता है। गोवर्धन परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए जरूरी है कि वे पूंछरी का लौठा के दर्शन कर अपनी हाजिरी लगाएं। यहां हाजिरी नहीं लगाई तो परिक्रमा पूरी नहीं मानी जाती है।

भगवान के सखा

पूंछरी के लौठा मंदिर के पुजारी विकास नाथ ने बताया कि ये भगवान श्रीकृष्ण के सखा हैं। परिक्रमा करने वालों की हाजिरी लेते हैं। मन की इच्छा पूरी करते हैं। जो भी मांगोगे मिल जाएगा। इनका भोग माखन मिस्री का लगता है और यही भोग ठाकुर जी को लगता है। इसी से पूंछरी का लौठा की महत्ता प्रतिपादित होती है।

पड़ौ रहै सिलौटा

विकास नाथ ने बताया- पूंछरी के लौठा के बारे में कहा जाता है- धन्य-धन्य पूंछरी कौ लौठा, अन्न खाए न पानी पिए पड़ौ रहै सिलौटा। धन्य-धन्य है पूंछरी कौ लौठा। सतयुग के शिव, त्रेता के हनुमान, द्वापर के मधुमंगल और कलयुग के पूंछरी का लौठा है। ये चरण हैं गिर्राज जी के। ठाकुर जी अपने दोस्त को गिर्राज जी के चऱणों में बैठाकर चले गए द्वारिका कि मैं लौटूंगा, लेकिन लौटे नहीं। तभी से लौटने का इन्तार कर रहे हैं। नाम ही पड़ गया पूंछरी का लौठा।

एक और मंदिर

पूंछरी का लौठा मंदिर के पास ही एक और मंदिर बन गया है। पूंछरी का लौठा मंदिर में शीश नवाने वालों को इस मंदिर में दर्शन के लिए बुलाया जाता है, लेकिन अधिकांश लोग जाते नहीं हैं।







ये भी पढ़ें

image