
पत्रिका स्पेशल: पाकिस्तान के करतारपुर में बने नानक-अटल सेतु
आगरा। पाकिस्तान के करतारपुर स्थित डेरा बाबा नानक सेक्टर का गुरुद्वारा के लिए सिखों को वीजा और पासपोर्ट में बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगले साल नानकदेव जी 550वां प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। इससे पहले सिख समुदाय बड़ा अभियान चलाएगा। गुरुसिख वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र पाल सिंह टिम्मा ने पत्रिका से बातचीत करते हुए जानकारी दी कि भारत और पाकिस्तान के बीच पड़ने वाली नदी पर सेतु का निर्माण कराने के लिए सरकार से प्रयास किए जाएंगे। जिससे आम श्रद्धालु भी इस पवित्र धार्मिक स्थल के दर्शन आसानी से कर सके।
अमृतसर से ढाई किलोमीटर दूर, बार्डर से दिखता है गुरुद्वारा
गुरुसिख वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंद्र पाल सिंह टिम्मा ने बताया कि अमृतसर के निकट पाकिस्तान बार्डर पर करतारपुर साहिब गुरुद्वारा स्थित है। बीएसएफ ने वहां व्यू प्वाइंट बना रखा है। जहां से दूरबीन के माध्यम से श्रद्धालुओं को बीएसएफ इस पवित्र गुरुद्वारा के दर्शन कराता है। उनकी सरकार से ये मांग है कि यहां से गुजरने वाली झेलम नदी पर पाकिस्तान सरकार से वार्ता कर पुल तैयार करा दे। पाकिस्तान की सरकार द्वारा गुरुसिख वेलफेयर एसोसिएशन का एक प्रस्ताव मंजूर किया गया था, जिसमें बिना वीजा के रास्ता खोलने की मंजूरी थी। लेकिन, भारत सरकार द्वारा ठोस कदम नहीं उठाने पर ये प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
पवित्र स्थल पर अलोप हुए थे नानक देव
रविंद्र पाल सिंह टिम्मा ने बताया कि करतारपुर साहिब ये गुरुद्वारा विशेष महत्व रखता है। नानक देवजी ने इस गुरुद्वारा पर अंतिम समय में 18 साल व्यतीत किए थे। वे यहां खेतीबाड़ी करते थे। संगतों को प्रवचन देते थे। यहां गुरुद्वारा और मस्जिद दोनों साथ साथ हैं। दोनों वर्ग गुरुनानक जी का सम्मान करते थे। गुरुनानक देवजी अलोप हुए थे। जब चादर हटाई गई तो उसके नीचे सिर्फ फूल थे। आधी चादर और आधे फूल मुस्लिम समुदाय ने दफन किए थे। वहीं हिंदू समुदाय ने आधे फूल और आधी चार को हिंदू रीति रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया था। गुरुसिख वेलफेयर एसोसिएशन जल्द ही सरकार से मिलकर इस मसले पर ठोस हल निकालने के लिए मांग करेगा।
अटल बिहारी वाजपेयी ने शुरू किए थे प्रयास
रविंद्र पाल सिंह टिम्मा का कहना है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने भारत पाकिस्तान के रिश्तों को मजबूत करने के प्रयास किए थे। इसलिए भारत सरकार से उनकी मांग है कि वे अटल बिहारी वाजपेयी के किए गए प्रयासों को पूरा करें। सिख समुदाय के आम श्रद्धालुओं भी इस गुरुद्वारा तक आसानी से जा सके, ऐसी योजना बनाएं।
Published on:
24 Sept 2018 05:10 pm
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