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91 साल के डॉक्टर ने होम्योपैथी में बनाई विशेष पहचान, पद्मश्री मिलने के बाद खोला स्वस्‍थ जीवन का राज

UP News: उत्तर प्रदेश की ताजनगरी के रहने वाले 91 साल के डॉक्टर आरएस पारीक को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उन्हें 70 साल से होम्योपैथी पद्धति से बेहतर इलाज करने के एवज में दिया गया है। पुरस्कार मिलने के बाद डॉ. पारीक ने स्वस्‍थ जीवन का राज बताया है। आइए जानते हैं…

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आगरा

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Vishnu Bajpai

Jan 27, 2024

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Padmashree Award Winner in Agra: उत्तर प्रदेश की ताजनगरी के रहने वाले 91 साल के डॉक्टर आरएस पारीक को पद्मश्री सम्मान से नवाजा गया है। यह पुरस्कार उन्हें 70 साल से होम्योपैथी पद्धति से बेहतर इलाज करने के एवज में दिया गया है। इससे पहले एसएन मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. डीके हाजरा को 2014 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 10 साल बाद चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करने के लिए डॉ. आरएस पारीक को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वरिष्ठ अधिवक्ता रवि अरोरा बताते हैं कि डॉ. आरएस पारीक समाजसेवा से जुड़े हुए हैं। गोवर्धन और राधाकुंड में सन्यासी माताओं को हर महीने नि:शुल्क परामर्श देते हैं। गो सेवा भी करते हैं।


आगरा के जानेमाने डॉ. पारीक दुनिया में भारतीय होम्योपैथिक पद्धति को पहचान दिलाने वाले 91 साल के डॉ. राधे श्याम पारीक को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने एक छोटे क्लीनिक से होम्योपैथी पद्धति से मरीजों का इलाज करना शुरू किया। रॉयल कालेज आफ लंदन से होम्योपैथी में ग्रेजुएशन करने के बाद कैंसर सहित अन्य बीमारियों में होम्योपैथी से इलाज पर शोध किया। अमेरिका, इंग्लैंड, रूस सहित कई देशों के डाक्टरों को होम्योपैथी में सटिफिकेट कोर्स कराना शुरू किया।


70 साल से होम्योपैथी पद्धति से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। इससे दुनिया भर में भारतीय होम्योपैथी पद्धति को अलग पहचान मिली और विदेश से डाक्टर प्रशिक्षण लेने के लिए उनके सेंटर पर आने लगे। देशभर से मरीज भी उनसे इलाज कराने के लिए आते हैं। उनकी पत्नी गीता रानी पारीक उनका पूरा साथ देती हैं। उनके बेटे डॉ. आलोक पारीक होम्योपैथिक चिकित्सक हैं और यश भारती से सम्मानित हो चुके हैं। इंटरनेशनल होम्योपैथी संघ के पहले भारतीय अध्यक्ष बने। डॉ. राजू पारीक सर्जन हैं और उनके पौत्र डॉ. प्रशांत पारीक सर्जन और डॉ. आदित्य पारीक भी होम्योपैथिक चिकित्सक हैं।


डॉ. पारीक मूलरूप से राजस्थान के नवलगढ़ के रहने वाले है, 21 वर्ष में बेलनगंज में एक छोटे क्लीनिक से होम्योपैथिक पद्धति से मरीजों का इलाज करना शुरू किया। उस समय होम्योपैथी को लोग जानते नहीं थे, चर्म रोग सहित कई बीमारियों में एलोपैथी कारगर साबित नहीं हुई तो मरीजों ने उनसे इलाज कराया। 1956 में उन्होंने रॉयल कालेज आफ लंदन से ग्रेजुएशन करने के बाद पारीक होम्योपैथिक रिसर्च सेंटर स्थापित किया। तब वो पानी के जहाज से इंग्लैंड गए थे, जो उस समय यह बड़ी बात हुआ करती थी। देश-विदेश के मरीजों का इलाज शुरू किया। उनके सेंटर पर मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण कैंसर, चर्म रोग सहित गंभीर और सामान्य बीमारियों पर शोध करना शुरू किया। केस स्टडी को विदेशों में होने वाली कार्यशालाओं में प्रस्तुति किया।

डॉ. पारीक बताते हैं "अच्छे स्‍वास्‍थ्य को बनाए रखना कठिन नहीं है। यदि हम खुद को स्वस्‍थ नहीं रखेंगे तो जीवन कष्टों से भर जाएगा। स्वस्‍थ रहने के लिए सबसे पहले संतुलित आहार की जानकारी रखनी जरूरी है। इसके साथ ही व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए। स्वस्‍थ जीवन के लिए यह दोनों जरूरी हैं। होम्योपैथी शरीर में रोगों का जड़ से नाश करती है। सबसे बड़ी बात ये है कि होम्योपैथी का कोई साइड इफेक्ट नहीं है। यानी यह पूरी तरह सुरक्षित है। पिछले 70 सालों से होम्योपैथी के जरिए हम लोगों का इलाज करते आए हैं। इसमें कई असाध्य रोग ठीक करने की ताकत है।"

-आगरा से प्रमोद कुशवाह की रिपोर्ट