
आगरा। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के 65वें राष्ट्रीय अधिवेशन के द्वितीय दिवस रोजगार परिदृश्य एवं संभावनाएं विषय पर आयोजित सत्र में विचार रखते हुए विद्यार्थी परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री निखिल रंजन ने कहा कि भारत में रोजगार की स्थिति ऐसी है कि भारत की जनसंख्या के हिसाब से 16 करोड़ जनसंख्या बेरोजगार हैं और भारतीय युवा ने केवल सरकारी व प्राइवेट नौकरी को ही अपना रोजगार समझा है। रोजगार केवल सरकार के माध्यम से मिलने वाला नहीं है, बल्कि समाज के द्वारा युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है।
कार्यक्षमता वाले युवाओं की आवश्यकता
जेएनयू के प्रोफेसर संतोष मल्होत्रा ने कहा कि कार्यक्षमता वाले युवाओं की महत्वता सर्वप्रथम व ज्यादा होती है, प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत कई परिवार स्वावलंबी हुए हैं, शिक्षा व स्वास्थ्य क्षेत्र में नोकरियों प्राइवेट स्तर पर ज्यादा है, दुपहिए व चार पहिये वाहन की मैन्यूफैक्चरिंग वाला विश्व मे दूसरा या तीसरा देश है। बांग्लादेश में मैन्युफैक्चरिंग 16 फीसद है, जबकि भारत मे मेन्यूफेक्चरिंग 12 फीसद है, पूर्व में 2012 में पॉलिसी नीति को बंद कर दिया गया था, बल्कि उसको पुनः लागू होना चाहिए, जो आज के युवाओं की सरकारी व प्राइवेट नौकरियों से जो हमारी अपेक्षाएं हैं उनको त्याग करके मैन्युफैक्चरिंग की तरफ ध्यान देने की बहुत ही आवश्यकता है।
बड़ी इकाइयां करती रोजगार उत्पन्न
लघु उद्योगों में भारत सरकार को अधिक रोजगार उत्पन्न करने चाहिए, अभाविप को आर्थिक रोजगार में अपनी भूमिका समझनी चाहिए, पूर्व में 6 वर्ष पहले शौचालय सेवा केवल 30 प्रतिशत परिवारों में थी, लेकिन पिछले 6 वर्ष के अंदर 70 प्रतिशत परिवारों में शौचालय सुविधा पहुंच चुकी है, जिसके लिए केंद्र सरकार सराहनीय है। 65 वर्ष तक भारत का लेवर लॉस 45 प्रतिशत था जिसे 6 वर्ष में भारत सरकार ने 30 प्रतिशत किया है। बड़ी इकाइयां ज्यादा से ज्यादा रोजगार उत्पन्न कर सकती है। ओर अंत मे भारत को औधोगिक नीति को अपनाना होगा इतना ही पर्याप्त रहेगा।
Published on:
24 Nov 2019 08:21 pm
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