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21 फरवरी को है महाशिवरात्रि, इस रात जागरण करने का है विशेष महत्व, जानिए क्यों!

  फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनायी जाने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है।

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आगरा

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suchita mishra

Feb 13, 2020

shivratri

Shivratri

यूं तो हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। शिवरात्रि को शिव आराधना का विशेष दिन माना गया है। लेकिन फाल्गुन मास के कृष्णपक्ष की चतुर्दशी को मनायी जाने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। इसे महाशिवरात्रि कहा जाता है। इस बार महाशिवरात्रि 21 फरवरी को मनायी जाएगी। कहा जाता है कि शिवरात्रि के दिन भगवान का व्रत व पूजन करने से वे अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनचाही मुराद पूरी करते हैं।

शिवरात्रि के दिन ऐसे करें पूजन
ज्योतिषाचार्य डॉ. अरविंद मिश्र के मुताबिक शिवरात्रि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करके भगवान के समक्ष हाथ में जल, अक्षत और दक्षिणा लेकर पहले व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव का जलाभिषेक करें। यदि घर में जलाभिषेक नहीं कर सकते तो मंदिर में जाकर कर दीजिए। घर में एक दीपक जलाएं और इसे अगली सुबह तक जलाकर रखें। भगवान को चंदन का तिलक लगाएं। उनकी पसंदीदा चीजें जैसे तीन बेलपत्र, भांग, धतूरा, जायफल, कमल गट्टे, फल, मिष्ठान, मीठा पान, इत्र आदि चढ़ाएं। दक्षिण चढ़ाएं। इसके बाद शिवचालीसा का पाठ करें। ॐ नमः शिवाय या ॐ नमो भगवते रूद्राय मंत्र का जाप करें। कम से कम एक माला से लेकर 5, 7, 11, 21, 51 या श्रद्धानुसार कर सकते हैं। इसके बाद भगवान की आरती गाएं। आखिर में केसर युक्त खीर का भोग लगा कर प्रसाद बांटें।

रात्रि में जागरण का विशेष महत्व
महाशिवरात्रि को जागरण की रात कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था, इसलिए इस रात सोना नहीं चाहिए। बल्कि भगवान का ध्यान करना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टि से भी महाशिवरात्रि पर जागरण का विशेष महत्व है। दरअसल इस रात को ग्रह का सेंट्रल फ्यूगल फोर्स एक खास तरह से काम करता है और ये बल ऊपर की ओर गति करता है। इस कारण ऊर्जा का प्रवाह ऊपर की ओर होता है। इसीलिए महाशिवरात्रि की रात के कुछ यौगिक नियम बनाए गए हैं। इस रात को रीढ़ की हड्डी सीधी करके ध्यान मुद्रा में बैठना चाहिए ताकि आप ऊर्जा के इस प्राकृतिक चढ़ाव का पूरा लाभ ले सकें।