
आगरा। हनुमान चालीसा के दोहे और पवित्र मंगल गीत (ओम मंगलम, ओमकार मंगलम, शिव मंगलम, सोमवार मंगलम..) के साथ श्रीराम कथा का शुभारम्भ होते ही श्रीराम के चरणों में हर भक्त ने दोनों हाथ ऊपर पर खुद को समर्पित कर दिया। व्यासपीठ पर बैठे संतश्री विजय कौशल जी महाराज ने चित्रकूट बने कोठी मीना बाजार में मंगलमय परिवार द्वारा आयोजित श्रीराम कथा के प्रथम दिन कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कथा का सिर्फ श्रवण ही न करें, उसे अत्मसात कर अपने साथ ले जाने का भी प्रयास करें। कथा अमृत और कल्पतरु के वृक्ष के समान है। सुरुतरु की छाया रूपी रामायण की शरण में जो भी आता है, उसके सभी दुख दूर भाग जाते हैं।
कथा होती खुद को संवारने के लिए
विजय कौशल जी महाराज ने कहा कि बाहर से हमें हमारा शीशा भी संवार देता है, लेकिन भीतर से सिर्फ भगवान या भगवान की कथा ही संवार सकती है। उपदेश दूसरे को सुधारने के लिए और कथा होती है खुद को संवारने के लिए। कथा हमें भीतर से संवारती। कथा सुनने का मौका भाग्य से भाग्यशाली लोगों को ही मिलता है। कथा प्रयास से नहीं प्रसाद के रूप में सुनने को मिलती है। प्रसाद लेने के लिए कतार में लगना पड़ता है, हाथ पसारना पड़ता है। अहंकारी को कभी यह प्रसाद नहीं मिलता, सिर्फ विनम्र ही कथा का प्रसाद पा सकता है। सात सुमंगल शगुन सुधा, साधु, सुरुतरू, सुमन आदि सभी कथा में एक स्थान पर मिलते हैं। कथा भगवान के मनोरथ भी पूर्ण करती है, फिर हम तो सान है। शैलपुत्री व शिवजी के संवाद के वर्णन करते हुए कहा कि पार्वती ने प्रशन किया कि ब्रह्म तो निर्गुण और निराकार है, फिर श्रीराम को ब्रह्म कैसे हुए? शिवजी ने कहा कि ब्रह्म स्वतंत्र चेतना है, जिसमें सगुण और निर्गुण का कोई भेद नहीं। वह सूक्ष्म बी है और विराट भी। निराकार का अर्थ जिसका कोई एक आकार न हो। अंत में श्रीराम जी की आरती कर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
ये रहे मौजूद
इस अवसर पर मुख्य रूप सांसद रामशंकर कठेरिया, उदयबान सिंह, सतीश ग्रवाल, मुरारीलाल फतेहपुरिया, मंगलम परिवार के अध्यक्ष दिनेश बंसल, राकेश अग्रवाल, हेमन्त भोजवानी, महावीर मंगल, महेश गोयल, कमल नयन, घनश्याम, निखिल गर्ग, रेखा अग्रवाल, पूजा भोजवानी, आशा अग्रवाल आदि उपस्थित थे।
Published on:
14 Dec 2019 07:20 pm
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