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वेतनभोगी कर्मचारी हैं तो आयकर रिटर्न में करना होगा ये काम

रिटर्न 2017.18 के लिए नया रिटर्न फॉर्म 1 'सहज'

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आगरा

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Abhishek Saxena

Apr 28, 2018

Property Tax news

Income tax department Taxes are at the forefront of people here

आगरा। अब वेतनभोगियों को भी वेतन के साथ अपनी अन्य जानकारियां भी साझा करनी होंगी। आयकर रिटर्न 2017.18 के लिए नया रिटर्न फॉर्म 1 सहज विभाग की वेबसाइट पर है। नए रिटर्न फॉर्म-1 ‘सहज’ में वेतनभोगी वर्ग को अपना आईटीआर भरने के लिए इस फॉर्म का इस्तेमाल करना है।

इन दिनों चार्टेड एकाउंटस के दफ्तरों में इस जानकारी के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है। सीए दीपिका अग्रवाल का कहना है कि इस साल के फॉर्म में करदाताओं को वेतन इनकम का ब्रेक-अप और हाउस प्रॉपर्टी से इनकम की भी जानकारी देनी होगी। आईटीआर फॉर्म-1 में वेतन, भत्तों, ऊपरी लाभ एवं वेतन के बदले अन्य लाभ को छोड़कर वे भत्ते जो टैक्स छूट के दायरे में नहीं आते, ऊपरी लाभ की रकम, वेतन के बदले में मिलने वाले लाभ की जानकारी देनी होगी। साथ ही आईटी एक्ट 1961 के सेक्शन 16 के तहत किए गए टैक्स छूट के दावे की भी जानकारी देनी होगी।

सेलरी ब्रेकअप भी उपलब्ध कराना होगा
आयकर का रिटर्न भरते समय नौकरीपेशा लोगों को सेलरी ब्रेकअप भी उपलब्ध कराना होगा। पिछले साल तक फॉर्म में टैक्सपेयर्स को सिर्फ अचल संपत्ति से होने वाली आमदनी के बारे में जानकारी देनी होती थी, लेकिन अब इसके अलावा और भी जानकारी देनी होगी, जैसे कि अचल संपत्ति खुद की है या किराए पर है। उन्हें अपनी अचल संपत्ति के बारे में भी जानकारी देनी होगी। घर की वार्षिक वैल्यू क्या है। होम लोन पर कितना ब्याज दिया गया। अचल संपत्ति से होने वाली आमदनी पर टैक्स की योग्यता इस बात पर निर्भर करती है कि संपत्ति करदाता ने खुद ली है या किराए पर है। अगर अचल संपत्ति न तो खुद की है और न ही किराए पर है तो भी इससे होने वाली आमदनी टैक्स के दायरे में आती है और करदाता को उसी हिसाब से टैक्स भरना होता है। जिस हिसाब से उस संपत्ति को किराए पर दिए जाने के बाद भरना होता है। होम लोन पर ब्याज में एक वित्त वर्ष में दो लाख रुपये से ज्यादा का डिडक्शन क्लेम नहीं किया जा सकता है। कर विशेषज्ञों के अनुसार, अगर घर होम लोन लेकर खरीदा हो तो वित्त वर्ष 2017-18 में जितना ब्याज चुकाया है, उसे अपनी आय में से घटाया जा सकता है।

वेतन के बदले लाभ
आयकर अधिनियम की धारा 17 के अनुसार, वेतन या भत्तों के अलावा कर्मचारी को मिलने वाली किसी भी तरह की राशि को ‘वेतन के बदले लाभ’ के वर्ग में रखा जाता है। इस तरह के भुगतान में आमतौर पर छंटनी लाभ, छूट और मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड से प्रति वर्ष 9.5 प्रतिशत से अधिक ब्याज या फिर रोजगार के शुरू होने या खत्म होने के बाद कर्मचारी द्वारा प्राप्त भुगतान से मिलने वाला ब्याज शामिल होता है।