
आगरा। आपके दिल की धड़कन (Heartbeat) भी अचानक घटती-बढ़ती है तो इसे दिल की नादानी न समझें। हो सकता है कि आपके दिल में बहने वाले करंट में शॉर्ट सर्किट हो रहा हो। मांसपेशियां कमजोर होने के साथ ही दिल फैल सकता है। इसे इसके इलाज में रेडियोफ्रीक्वेंसी (Radiofrequency) की नई तकनीक अचूक है। दिल में शॉर्ट सर्किट (short circuit) वाले तारों पर निश्चित वेबलेंथ की खुराक छोड़कर इन्हें फ्यूज कर दिया जाता है। अच्छी खबर यह है कि रेडियोफ्रीक्वेंसी ऑब्लेशन की तकनीक अब आगरा में उपलब्ध है।
हर आयु वर्ग में समस्या
जयपुर के हार्ट एंड जनरल हॉस्पिटल में चीफ इलेक्ट्रो फिजियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल सिंहल ने बताया कि उन्होंने अनुभव किया है कि दिल की अनियमित धड़कन से ग्रस्त बड़ी संख्या में मरीज सामने आ रहे हैं। इनमें बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर आयु वर्ग के लोग हैं। ऐसे में उन्होंने यहां रेडियोफ्रीक्वेंसी तकनीक से यहां इस समस्या का उपचार शुरू किया है। रविवार को पहला केस किया गया। मरीज के दिल की धड़कन अचानक बढ़ जाती थी। वह लम्बे समय से इलाज करा रहा था, लेकिन कुछ समय बाद यह दोबारा होता था। तकरीबन आधे घंटे के आरएफए प्रोसीजर के बाद मरीज अब पूरी तरह ठीक है। छह घंटे अस्पताल में रखने के बाद उसी दिन मरीज को डिस्चार्ज भी कर दिया गया है।
क्या है एरिथीमिया ?
दिल एक सामान्य गति से धड़कता है। अगर आपकी धड़कन बिना कारण अनियमित हो जाती है, तो यह कई बार खतरनाक हो सकता है। आम तौर पर मेहनत करने या शरीर के अस्वस्थ होने पर दिल की धड़कन बढ़ सकती है लेकिन अगर इसके बढ़ने और घटने का आपको कोई कारण नहीं समझ आ रहा है, तो सावधान हो जाएं क्योंकि ये कई बार जानलेवा भी हो सकता है। दिल की अनियमित धड़कन को एरिथीमया कहते हैं।
ईपीएस से पहचान, आरएफए से इलाज
विशेषज्ञ बताते हैं कि एरिथीमिया के निदान का सबसे जरूरी पहलू इसकी पहचान है, जो एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। अक्सर लोग इसके लक्षणों को नजरअंदाज करते हैं। फिजीशियन इसे ईसीजी रिपोर्ट के आधार पर ही पहचान सकते हैं, जबकि इसके बाद आपको इलाज के लिए सही जगह पहुंचने की जरूरत पड़ती है। अगर आप सही जगह पहुंच जाएं तो वहां विशेषज्ञ इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिकल स्टडी (ईपीएस) कर दिल में शॉर्ट सर्किट वाले प्वाइंट को पकड़ सकते हैं। इसके बाद रेडियोफ्रीक्वेंसी ऑब्लेशन (आरएफए) तकनीक से इसका इलाज किया जाता है। इसमें शॉर्ट सर्किट वाले स्थान पर तरंगें छोड़कर इसे फ्यूज कर दिया जाता है। हार्ट बीट बढ़ने, घटने या कुछ समय के लिए रूकने की बीमारी हमेशा के लिए ठीक हो जाती है।
फैलता है दिल, कई बार रुक सकती है धड़कन
इंसान के दिल की धड़कन सामान्य रूप से 60 से 100 प्रति मिनट होती है। किन्तु कई बार यह अचानक बढ़कर 200 से 250 और कभी अचानक 40 तक रह जाती है। कई मामलों में दिल कुछ समय के लिए धड़कन बंद भी कर सकता है। दिल की पंपिंग तेज होने पर ब्लड प्रेशर भी अनियमित होता है। 18 से 40 के आयु वर्ग में यह बीमारी ज्यादा देखी जाती है। पंपिंग लंबे समय तक तेज रहने पर दिल फैल सकता है। दिल की मांसपेशियां कमजोर होने पर हार्ट अटैक में मरीज की जान का रिस्क 60 फीसद तक बढ़ जाता है।
टीम को बधाई दी
आगरा में दिल की असामान्य धड़कन का पहली बार रेडियोफ्रीक्वेंसी से इलाज किया गया है। सोना रेनबो कॉर्डियक केयर में इसे संभव किया डॉ. राहुल सिंहल ने। सोना रेनबो कॉर्डियक केयर की उपलब्धि पर सोना रेनबो कार्डियक टीम का नेतृत्व कर रहे पद्मश्री डॉ प्रवीण चंद्रा, रेनबो आईवीएफ की निदेशक डॉ. जयदीप मल्होत्रा, रेनबो हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव लोचन शर्मा ने डॉ. राहुल और उनकी टीम को बधाई दी है।
Updated on:
24 Sept 2019 08:17 pm
Published on:
24 Sept 2019 08:16 pm
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